नई दिल्ली। राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका कोर्ट में स्वीकार होने के बाद एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि वहां 800 सालों से दरगाह है। नेहरू से लेकर अभी तक सभी प्रधानमंत्री दरगाह पर चादर भेजते रहे हैं। पीएम मोदी भी चादर भेजते हैं। भाजपा–संघ ने मस्जिदों और दरगाहों को लेकर ये नफरत क्यों फैलाई है?
ओवैसी ने कहा कि निचली अदालतें पूजा स्थल कानून पर सुनवाई क्यों नहीं कर रही हैं? इस तरह कानून का राज कहां रहेगा और लोकतंत्र खत्म हो गया है क्या? यह देश के हित में नहीं है। मोदी और आरएसएस का शासन देश में कानून के शासन को कमजोर कर रहा है। ओवैसी ने इससे पहले सोशल मीडिया पर भी इस मामले में सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि हिंदुत्व तंज़ीमों का एजेंडा पूरा करने के लिए कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। सुल्तान–ए–हिन्द ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भारत के मुसलमानों के सबसे अहम औलिया इकराम में से एक हैं। उनके आस्तान पर सदियों से लोग जा रहे हैं और जाते रहेंगे। कई राजा, महाराजा, शहंशाह, आए और चले गए, लेकिन ख़्वाजा अजमेरी का आस्तान आज भी आबाद है। उन्होंने कहा कि 1991 का इबादतगाहों का कानून साफ–साफ कहता है के किसी भी इबादतगाह की मजहबी पहचान को तब्दील नहीं किया जा सकता, न अदालत में इन मामलों की सुनवाई होगी। ये अदालतों का कानूनी फर्ज है कि वो 1991 एक्ट को अमल में लाएं।
हिंदू सेना ने दायर की है याचिका
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष वादी विष्णु गुप्ता ने विभिन्न साक्ष्य के आधार पर अजमेर दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा पेश किया था। इस मामले में बुधवार को कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मामलात व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण धरोहर को नोटिस जारी करने के आदेश दिया था। अब 20 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।


