भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी नाथूराम गोडसे की विचारधारा के हैं, वह गांधीजी की विचारधारा के कतई नहीं हैं। भाजपा के लोग गांधीजी और गांधीजी की विचारधारा के खिलाफ हैं।
भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के बेटे द्वारा चामुंडा माता मंदिर के पुजारी के साथ की गई मारपीट को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध और प्रदर्शन के चलते विधायक के बेटे पर एफआईआर हुई है, गिरफ्तारी अभी भी नहीं हुई है। आज भी उन्हें प्रोटेक्ट किया जा रहा है। भाजपा और भाजपा के लोगों से संबंधित लोगों को अहंकार हो गया है कि हम कुछ भी करें, पुलिस हम पर कुछ नहीं करेगी।
दलित परिवार के दूल्हों का मामला भी उठाया
इंदौर में दलित परिवार के दूल्हे को मंदिर में दर्शन न करने जाने के मामले में दिग्विजय सिंह ने कहा कि महू में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंबा–चौड़ा भाषण अंबेडकर जयंती पर दिया है लेकिन आज भी अनुसूचित जाति समाज का व्यक्ति मंदिर में न जा सके, यह घोर अपराध है। ऐसे मामले में कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के शासन में मुसलमानों के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने और उन्हें पंचर बनाने वाला बनने के लिए मजबूर करने के सवाल पर कहा कि क्या पंचर बनाने वाला हर व्यक्ति मुसलमान है? क्या हिन्दू लोग पंचर नहीं बना रहे हैं।
धर्म और नफरत का सहारा ले रहे रामदेव
दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए धर्म और नफरत का सहारा लिया है, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा और आरएसएस धर्म का इस्तेमाल कर समाज में नफरत फैला रहे हैं और रामदेव जैसे लोग उनके इस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव द्वारा एक्स पर डाले गए एक वीडियो का ज़िक्र किया, जिसमें रामदेव ने शरबत जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रामदेव ने रूह अफज़ा शरबत को मुसलमानों से जोड़ते हुए कहा कि उससे मिलने वाले पैसे से मस्जिदें और मदरसे बनते हैं जबकि पतंजलि का शरबत पीने से गुरुकुल और आचार्यकुलम बनते हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, यह बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि देश के संविधान और कानून के खिलाफ भी है। यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और समाज में नफरत फैलाने वाला है।


