इंदौर। केसरबाग रोड पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के सर्वशक्तिमान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से जो कुछ भी कहा, वह इंदौर की राजनीति में ही नहीं, पूरी भाजपा में चर्चा का विषय बना हुआ है। विजयवर्गीय ने कहा कि वन विभाग वाले पौधे नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सीएम से आग्रह किया कि विदेश जाने से पहले वन विभाग को निर्देश देकर जाएं। अब चर्चा इस बात की हो रही है क्या ठाकुर के हाथ फिर गायब हो गए।
बात अगस्त 2011 की होगी। नगर निगम द्वारा आयोजित ‘आओ बनाएं अपना इंदौर‘ कार्यक्रम में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के सामने विजयवर्गीय ने खुद को शोले फिल्म का ठाकुर बताया था, जिसके हाथ कटे हुए हैं। विजयवर्गीय ने कहा था कि इंदौर के विकास के मामले में उन्हें तो शोले का ठाकुर बना दिया गया है। पांच साल पहले मुख्यमंत्री ने उन्हें इंदौर को छोड़कर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी। यही कारण है कि उन्होंने पिछले पांच वर्षो में इंदौर के विकास के मसले पर किसी तरह की रुचि नहीं ली। तब विजयवर्गीय ने शिवराज चौहान पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री चले जाएंगे, मंत्री चले जाएंगे, मगर अगली पीढ़ी हमें याद करेगी।
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आज फिर क्यों फूटा दर्द
आज के पौधारोपण कार्यक्रम में विजयवर्गीय ने मंच से कहा कि वन विभाग से हमें सहयोग नहीं मिल रहा है, पौधे समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। अब तक हम 7 लाख पेड़ लगा चुके हैं। हमारा 51 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है, लेकिन वन विभाग से उतना सहयोग नहीं मिल रहा जितना मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री जी से निवेदन करूंगा कि विदेश जाने से पहले वन विभाग वालों को निर्देश देकर जरूर जाएं।
पिछले साल तो मिल गए थे पौधे
पिछले साल भी मंत्री विजयवर्गीय ने 51 लाख पौधे लगाने के रिकॉर्ड का दावा किया था। तब वन विभाग से लेकर सभी विभागों ने सहयोग किया था। हालांकि इतने पौधे लगाने की जगह को लेकर ही विवाद उठता रहा। पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी पत्र लिखकर इस पर सवाल उठाए थे। इस बार भी मंत्री जी को रिकॉर्ड बनाना है, लेकिन उनकी बातों से लगता है कि वन विभाग सहयोग नहीं कर रहा। आखिर ऐसा क्यों हुआ?
कहा तो यही जा रहा-कोई विभाग नहीं सुनता
भाजपा में ही इस बात की चर्चा है कि मंत्रीजी की कोई विभाग नहीं सुन रहा। इसका कारण खुद को सबसे ऊपर समझना है। इसी वजह से वे कुंठा में रहते हैं और किसी भी सीएम से उनकी नहीं बनती। वर्तमान सीएम डॉ.मोहन यादव से उनके संबंधों की चर्चा भी जगजाहिर है। ऐसे में अफसर भी मंत्रीजी को भाव नहीं देते। आज के मंत्रीजी के भाषण से तो यह साबित भी हो रहा है।



