ईडी की चार्जशीट में राहुल-सोनिया का नाम आने पर भड़की कांग्रेस, सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई का लगाया आरोप

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नई दिल्ली। नेशलन हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सोनिया गांधी और राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अब कांग्रेस पूरे देश में ईडी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सरकार की विपक्ष के खिलाफ बदले की भावना की कोई सीमा नहीं है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत नेशनल हेराल्ड मामले का इस्तेमाल कर कार्रवाई की जा रही है ताकि विपक्ष की आवाज को चुप कराया जा सके। यह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की हताशा को दर्शाता है, जो लोगों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहे हैं और लगातार ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि ऐसा लगता है कि वे (भाजपा) भूल गए हैं कि यह एक ऐसा परिवार है जिसने देश के लिए अपना खून बहाया है। उनकी ये छोटी चालें और एजेंसियों का इस्तेमला करने, हमें रोकने वाला नहीं है, बल्कि इससे विनाशकारी शासन के खिलाफ हमारे संकल्प और मजबूत होंग।

अब 25 अप्रैल को सुनवाई

ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य लोगों के नाम हैं। मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें 25 अप्रैल को सुनवाई होगी।

जयराम रमेश ने कहा-बदले की राजनीति

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को जब्त करना कानून के शासन का मुखौटा ओढ़कर एक राज्य प्रायोजित अपराध है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा की गई बदले की राजनीति और डरानेधमकाने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप नहीं बैठेगा।

पंडित नेहरू ने 1937 में किया था गठन

उल्लेखनीय है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलगअलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब एजेएल के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही एजेएल के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा।, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक एजेएल पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब एजेएल ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद एजेएल प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।

2012 में स्वामी ने दर्ज कराया मामला

2012 में भाजपा के नेता और देश के नामी वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया कि यंग इंडिया लिमिटेड ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए गलत तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट

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