उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत विजिलेंस ने रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर छापा मारकर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा किया है। छापेमारी में घर के अलग-अलग हिस्सों और तिजोरियों से भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट, आभूषण और कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
विजिलेंस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ₹1.62 करोड़ नकद, लगभग 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट और आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹20 करोड़ बताई जा रही है, बरामद हुए। इसके अलावा ₹13 करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के दस्तावेज और करोड़ों रुपये के निवेश से जुड़े प्रमाण भी मिले। शुरुआती आकलन के अनुसार बरामद संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹35 करोड़ है।
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जांच एजेंसियों के मुताबिक, परिवहन आयुक्त की शिकायत के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में ललित कुमार की वैध आय करीब ₹93 लाख पाई गई, जबकि उनकी संपत्तियों और खर्च का आंकड़ा इससे कहीं अधिक सामने आया। इसके आधार पर वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया गया, जिसकी विवेचना बाद में विजिलेंस को सौंप दी गई।
अदालत से सर्च वारंट मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने लखनऊ के अलीगंज स्थित आवास पर पुलिस बल की मौजूदगी में तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान ज्वैलर्स की तिजोरियों जैसी दो बड़ी तिजोरियां मिलीं, जिनमें नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट और कीमती आभूषण रखे थे। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई i20, एक रिवॉल्वर, बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य निवेश के दस्तावेज भी बरामद किए गए।
जांच में लखनऊ, नोएडा, बाराबंकी और रायबरेली समेत कई स्थानों पर आवासीय भूखंड, मकान, कृषि भूमि और फ्लैट बुकिंग से जुड़े दस्तावेज मिलने की भी जानकारी सामने आई है। एजेंसियां अब इन संपत्तियों के स्रोत और कथित बेनामी निवेश की भी जांच कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, ललित कुमार के खिलाफ पूर्व में भी भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही थीं। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, अन्य अधिकारियों के खिलाफ व्यापक जांच को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या इस कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ और बड़े खुलासे होंगे? क्या अवैध संपत्ति रखने वाले अन्य अधिकारियों पर भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
आपकी क्या राय है? क्या भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ऐसे छापे और कड़ी कार्रवाई नियमित रूप से होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



