अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव थमता नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी कार्रवाई और तीखे बयानों के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला और कहा कि ईरान अपमानजनक भाषा का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कदमों से देता है।
अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान एक सभ्य और साहसी राष्ट्र है, जिसकी गरिमा अपमानजनक भाषा से कम नहीं हो सकती। उन्होंने लिखा कि ईरानी अपनी संस्कृति, शालीनता और नैतिक मूल्यों के लिए जाने जाते हैं तथा देश अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
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ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने उन खाड़ी देशों को चेतावनी दी है, जो कथित तौर पर अमेरिका का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को अपने तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए और दावा किया कि ईरान अपनी सुरक्षा के मामले में किसी “रेड लाइन” से बंधा नहीं रहेगा।
वहीं, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना और वायु सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। IRGC ने आगे चेतावनी दी कि यदि अमेरिका की ओर से और हमले किए गए, तो क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि इस संघर्ष का असर वैश्विक सुरक्षा, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध की ओर धकेल देगा, या कूटनीतिक प्रयास हालात को संभाल पाएंगे?



