प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कई अहम रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों ने सहमति जताई। इस बैठक को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और यूरेनियम सप्लाई पर बड़ा फैसला
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दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर सहमति जताई। साथ ही वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात का रास्ता भी साफ हो गया, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
समुद्री सुरक्षा और साइबर टेक्नोलॉजी पर फोकस
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त Maritime Security Roadmap को मंजूरी दी। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीकों और मजबूत सप्लाई चेन के लिए नई रणनीतिक साझेदारी पर भी समझौता हुआ।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को नई मजबूती
दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को अपना प्रमुख सुरक्षा साझेदार बताते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही रक्षा अभ्यासों को और उन्नत बनाने तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप
बैठक के दौरान भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बीच उभरती तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण MoU पर भी हस्ताक्षर किए गए। इससे तीनों देशों के बीच हाई-टेक सेक्टर में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और निवेश को मिलेगा नया विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ECTA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में लगातार वृद्धि हुई है। अब दोनों देशों ने Comprehensive Economic Cooperation Agreement (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने का फैसला किया है, जिससे आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
गगनयान मिशन को मिलेगा ऑस्ट्रेलिया का साथ
भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को भी बड़ा समर्थन मिला है। ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जो भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
आतंकवाद और वैश्विक शांति पर साझा संदेश
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मुकाबला वैश्विक सहयोग से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में जारी संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए ये ऐतिहासिक समझौते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल देंगे और भारत को वैश्विक रणनीतिक ताकत के रूप में नई ऊंचाई पर पहुंचाएंगे?
आपकी क्या राय है? क्या भारत-ऑस्ट्रेलिया की यह मजबूत होती साझेदारी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव को नई दिशा देगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



