आत्मनिर्भरता,भारत ने एक और मिसाल कायम की

आत्मनिर्भरता की ओर लगातार कदम बढ़ाते हुए भारत ने एक और मिसाल कायम की है। रेफरेंस फ्यूल के उत्पादन में भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत में पहली बार इंडियन ऑयल द्वारा उत्पादित ‘रेफरेंस गैसोलीन और डीजल ईंधन’ का शुभारंभ किया। इससे भारत ने फ्यूल सेक्टर में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। रेफरेंस फ्यूल बेहद उच्च कोटि का फ्यूल होता है, जो सामान्य या प्रीमियम पेट्रोल और डीजल से काफी बेहतर होता है। दुनिया भर में वाहन निर्माता कंपनियां इसका इस्तेमाल गाड़ियों के इंजन के रिसर्च के लिए करती हैं। भारत दशकों से रेफरेंस फ्यूल की मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहा है। लेकिन अब सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन देश में ही रेफरेंस फ्यूल का उत्पादन करेगी। अब वाहन मैन्युफैक्चरर्स और परीक्षण एजेंसियों को कम कीमत पर ये उच्च कोटि के फ्यूल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। ओडिशा में आईओसी की पारादीप रिफाइनरी ‘रेफरेंस’ ग्रेड के पेट्रोल का उत्पादन करेगी जबकि हरियाणा के पानीपत में स्थित इकाई ऐसी गुणवत्ता वाले डीजल का उत्पादन करेगी।दुनिया में रेफरेंस फ्यूल के केवल तीन आपूर्तिकर्ता ही हैं जिनमें अमेरिकी दिग्गज शेवरॉन भी शामिल है। सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमत जहां 90 से 96 रुपये प्रति लीटर है वहीं आयातित ‘रेफरेंस’ फ्यूल 800-850 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलता है। घरेलू स्तर पर रेफरेंस फ्यूल का उत्पादन होने से इसकी कीमत में काफी कमी आने की उम्मीद है।
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