भारतीय नौसेना प्रमुखों का सम्मेलन 2025: समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा है कि भारतीय नौसेना भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह किसी भी समय, कहीं भी और किसी भी तरीके से इस जिम्मेदारी को निभाती रहेगी।
सम्मेलन के प्रमुख बिंदु:
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नौसेना प्रमुखों का यह सम्मेलन नौसेना भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
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इसमें आठ पूर्व नौसेना प्रमुखों ने भाग लिया, जिनके सामूहिक अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण का लाभ उठाने पर चर्चा हुई।
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सम्मेलन के दौरान भारतीय नौसेना की नीतिगत पहल, तकनीकी विकास, परिचालन रसद और रणनीतिक बदलावों पर अपडेट दिया गया।
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‘मंथन’ सत्र में उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य, युद्ध रणनीतियों और समुद्री सुरक्षा पर विचार-विमर्श हुआ।
भारतीय नौसेना की रणनीतिक प्राथमिकताएँ:
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समुद्री सुरक्षा: भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और स्थिर समुद्री परिवेश सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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तकनीकी नवाचार: नौसेना को आधुनिक तकनीकों और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के जरिए मजबूत किया जाएगा।
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आत्मनिर्भर भारत: नौसेना को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत अधिक आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।
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रणनीतिक समन्वय: पहले नौसेना 13 अलग-अलग स्थानों से संचालित होती थी, लेकिन अब नौसेना भवन में केंद्रीय कमान स्थापित की गई है, जिससे संचालन में समन्वय बढ़ेगा।
सम्मेलन की मुख्य उपलब्धियाँ:
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“लीगेसी ऑफ लीडरशिप: नेवल चीफ्स थ्रू टाइम” पुस्तक का विमोचन, जिसमें पूर्व नौसेना प्रमुखों की प्रेरणादायक कहानियाँ शामिल हैं।
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नौसेना प्रमुख ने भारतीय नौसेना की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने और देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस सम्मेलन ने भारतीय नौसेना की रणनीतिक दिशा को स्पष्ट किया और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नौसेना को और अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया। आधुनिक प्रौद्योगिकी और रणनीतिक नवाचारों को अपनाकर भारतीय नौसेना को एक शक्तिशाली वैश्विक समुद्री बल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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