भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर एस. जयशंकर का बड़ा बयान: “अब हम पूरी तरह से तैयार हैं”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (GTS) में बोलते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए पूरी तरह से तैयार है।
जयशंकर ने बताया कि पहले ट्रंप प्रशासन के साथ चार साल तक बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हालांकि अब हालात बदल गए हैं और दोनों पक्षों के बीच वैचारिक सहमति बन चुकी है कि एक स्थायी और संतुलित व्यापार समझौता किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “यह एक खुली प्रक्रिया नहीं है क्योंकि अतीत में व्यापार वार्ताओं से जो निराशा हुई, उसे ध्यान में रखते हुए यह प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इस बार हम बहुत ज़्यादा तत्परता और तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारी टीमें उत्साहित हैं, और इस बार बातचीत को धीमा करने का आरोप हम पर नहीं लगाया जा सकता।”
अमेरिका में बदलाव और चीन की भूमिका
एस. जयशंकर ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, साथ ही चीन की उन्नति ने भी वैश्विक व्यापार और रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि चीन के बढ़ते प्रभाव ने अमेरिका की स्थिति को भी बदला है और यही बदलाव भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की संभावनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
जयशंकर ने तर्क दिया कि व्यापार की कहानी अब तकनीक से जुड़ गई है, और “डीप सीक” (Deep Seek) इसका एक उदाहरण है। चीन के बदलावों ने अमेरिका को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
अमेरिका-चीन संबंधों पर भारत का अनुभव
उन्होंने अमेरिका-चीन संबंधों के बारे में कहा कि भारत ने दोनों देशों के साथ दो चरम स्थितियों का अनुभव किया है—एक समय में तीखी प्रतिस्पर्धा और एक समय में अत्यधिक सहयोग। उन्होंने इसे “गोल्डीलॉक्स समस्या” बताया, जहां कोई भी स्थिति भारत के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं रही।
व्यापार और रणनीति अब अलग नहीं
जयशंकर ने कहा, “अब कुछ भी केवल व्यापार नहीं रहा। हर चीज़ में रणनीतिक और व्यक्तिगत पक्ष शामिल हो गया है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज की दुनिया में रक्षा, राजनीति और व्यापार अलग-अलग नहीं देखे जा सकते।
यूरोप की स्थिति पर टिप्पणी
यूरोप को लेकर जयशंकर ने कहा कि पांच साल पहले तक यूरोप की स्थिति भौगोलिक दृष्टिकोण से मजबूत थी, लेकिन अब अमेरिका, रूस और चीन के साथ त्रिकोणीय संबंधों में तनाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि यूरोप की वर्तमान स्थिति के लिए तकनीकी परिवर्तन भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं।
जयशंकर के इस व्यापक और रणनीतिक दृष्टिकोण से स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक मंच पर एक परिपक्व और संतुलित नीति के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां हर व्यापारिक कदम देशहित में और दीर्घकालिक सोच के साथ उठाया जा रहा है।
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