नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत (5.5%) पर बनाए रखने का फैसला लिया है। इसके कारण अपने लोन की ईएमआई कम होने की आस लगाकर बैठे लोगों को निराशा हाथ लगी है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज प्रमुख नीतिगत दरों की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने तटस्थ रुख जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि ब्याज दरों को भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और देश में मौजूद क्षमता को देखते हुए तय किया गया है। संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में कमी का एलान नहीं किया। ऐसे में नीतिगत दरों से जुड़े ऋणों की ईएमआई में फिलहाल बदलाव नहीं होने वाली। इससे पहले उन्होंने जून की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स में कमी का एलान किया था। अप्रैल की पॉलिसी में भी केंद्रीय बैंक ने 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की थी। फिलहाल यह 5.50% पर बरकरार है।
👉 यह भी पढ़ें:
- Reserve Bank of India (RBI) ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, कम नहीं होगी आपकी ईएमआई
- अभी नहीं बढ़ेगी होम लोन की ईएमआई, आरबीआई ने रेपो रेट बरकरार रखा, गर्वनर बोले-अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर
- आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, आपकी लोन की किस्तें नहीं होंगी कम
- रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती, अब दर 5.5%: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का एलान
महंगाई के अनुमानों को 3.7% से घटाकर 3.1% किया गया
महंगाई पर बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए इसके अनुमान को 3.7 प्रतिशत से घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया। फरवरी 2025 से, आरबीआई नीतिगत दरों में 100 आधार अंकों की कटौती कर चुका है। जून में अपनी पिछली नीति समीक्षा में, उसने रेपो दर को 50 आधार अंकों की कटौती करके 5.5 प्रतिशत कर दिया था।
फरवरी से जून के बीच की गई थी रेपो रेट में कटौती
सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ 4 प्रतिशत पर बनी रहे। एमपीसी की सिफारिश के आधार पर, आरबीआई ने खुदरा मुद्रास्फीति में कमी के बीच फरवरी और अप्रैल में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की तथा जून में 50 आधार अंकों की कटौती की। इस साल फरवरी से खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से नीचे चल रही है।


