संजीव अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें सात दिन की हिरासत में भेज दिया गया।
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि मामले में धन के लेनदेन, जमीन सौदों और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच बाकी है, जिसके लिए अरोड़ा से गहन पूछताछ जरूरी है।
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एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आर्थिक लेनदेन से जुड़े सुराग मिले हैं। इन कड़ियों को जोड़ने और पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए आमने-सामने पूछताछ आवश्यक बताई गई है।
बताया जा रहा है कि हिरासत के दौरान अरोड़ा से चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना से जुड़े कुछ परियोजनाओं, कथित फर्जी कंपनियों और संपत्ति सौदों के बारे में सवाल किए जा सकते हैं। साथ ही कुछ कारोबारियों और अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
इस कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।


