नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ईवीएम पर पाबंदी लगाकर वैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब आप चुनाव हार जाते हैं तो ईवीएम से छेड़छाड़ होती है और जब जीत जाते हैं तो ईवीएम ठीक रहता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता केए पॉल ने कहा ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगन मोहन रेड्डी जैसे नेताओं ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ पर सवाल उठाए हैं। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि ईवीएम से राजनीतिक पार्टियों को दिक्कत नहीं है, आपको क्यों है? ऐसे आइडिया कहां से लाते हो? अदालत ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू या जगन मोहन रेड्डी जब चुनाव हार जाते हैं, तो ईवीएम से छेड़छाड़ होती है, लेकिन जब जीतते हैं तो सब ठीक रहता है।
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अपनी याचिका में याचिकाकर्ता नंदिनी शर्मा ने कहा है कि ईवीएम के बारे में अपोजीशन पार्टियों की चिंताओं को सबसे पहले बैलेट पेपर के ज़रिए चुनाव कराकर दूर किया जाना चाहिए, न कि सत्तारूढ़ भाजपा की मर्जी के मुताबिक काम करना चाहिए। नंदिनी शर्मा ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 61ए को रद्द करने की मांग की, जो ईसीआई को ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने का अधिकार देती है। जनहित याचिका में कहा गया था कि ईवीएम के प्रति सत्तारूढ़ दल का अतिरिक्त प्यार और समर्थन ईवीएम मशीनों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।


