नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों से चर्चा की। पीएम मोदी ने बच्चों को एग्जाम के प्रेशर से निकलने के उपाय भी बताए। पीएम मोदी ने बच्चों से पूछा कि आप क्रिकेट देखते हैं? उन्होंने उदाहरण दिया कि क्रिकेटर का ध्यान प्रेशर पर नहीं बल्कि गेंद पर होता है और इसलिए वह अच्छा प्रदर्शन करते हैं। वैसे ही अगर आप भी अपनी पढ़ाई का लक्ष्य तय रखेंगे तो आपको भी प्रेशर महसूस नहीं होगा।
एक छात्रा ने परीक्षा पे चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि मेरे मन में चिंता रहती है कि अगर मैं फेल हो गई तो क्या होगा? तो इस डर से कैसे बचें? पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग फेल हो जाते हैं उनका जीवन रुक नहीं जाता। आपको तय करना है कि जीवन में सफल होना है या किताबों से सफल होना है। आपको सोचना चाहिए कि आपकी असफलताएं तो आपकी गुरु हैं जो आपको सिखाती हैं। ऐसे में आपको उनसे डर नहीं लगेगा और आपको सीखने की इच्छा होगी। हर साल 10वीं में 12वीं में 40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत बच्चे फेल होते हैं, उनका क्या होता है? बच्ची कहती है कि वो दोबारा से कोशिश करते हैं। पीएम कहते हैं कि फिर से फेल हो गए तो? जिंदगी अटक नहीं जाती है। आपको तय करना होगा जीवन में सफल होना है या फिर किताबों से सफल होना है। जीवन में सफल होने का एक उपाय यह होता है कि आप अपने जीवन की जितनी विफलताएं हैं उनको अपना टीचर बना लें। आपको मालूम होगा कि क्रिकेट मैच होता है तो बाद में सारे प्लेयर बैठकर देखते हैं कि हमने क्या गलती की और इसका सुधार कैसे किया जाए।
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जीवन में सिर्फ परीक्षाएं नहीं
पीएम मोदी ने बच्चों से कहा कि जीवन सिर्फ परीक्षाएं नहीं हैं, जीवन को समग्रता में देखना चाहिए। अब आपने जैसे दिव्यांग जनों के जीवन को बड़ी बारीकी से देखना चाहिए। परमात्मा ने कुछ चीजें उन्हें नहीं दी हैं, परमात्मा ने कुछ और चीजें इतनी एक्ट्राओडिनरी दी होती हैं कि वो उसके जीवन का संबल बन जाती हैं, ताकत बन जाती हैं। तो आपके अंदर भी परमात्मा ने आपके अंदर भी कुछ कमियां रखी हैं और कुछ विशेषताएं भी रखी हैं।
केरल की छात्रा की हिंदी सुन हुए दंग
केरल की छात्रा की अच्छी हिंदी सुन


