एक सीएम ने बांटे प्लॉट, दूसरे की भी मंशा साफ, फिर भी आईडीए के भंवरजाल से निकल नहीं पा रही पुष्प विहार की फाइल

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इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण के एक पूर्व सीईओ कहा करते थे कि यहां फाइलें जलेबी की तरह घूमती हैं। यह परंपरा आज भी कायम है। यह हम नहीं कह रहे, योजना क्रमांक 171 स्थित पुष्प विहार कॉलोनी के 950 प्लॉटधारक कह रहे हैं। लंबे संघर्ष के बाद प्लॉट मिलने के बाद भी यह प्लॉटधारक मकान नहीं बना पा रहे हैं, क्योंकि इसकी एनओसी की फाइल आईडीए में ही एक टेबल से दूसरे टेबल और एक अलमारी से दूसरी अलमारी तक भटक रही है।

उल्लेखनीय है कि आईडीए की योजना क्रमांक 171 स्थित पुष्प विहार कॉलोनी की जमीन पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया था। अपनी मेहनत की कमाई से यहां प्लॉट खरीद चुके लोग लंबे समय तक इसके लिए संघर्ष करते रहे। जब सरकार के निर्देश पर भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चला तो इस कॉलोनी की जमीन को भी मुक्त कराया गया। इसके बाद प्लॉटधारकों को उम्मीद जगी कि अब उन्हें उनका हक मिल जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बांटे थे प्लॉट

तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में 950 लोगों को पुष्प विहार के प्लॉट बांटे थे। तब कलेक्टर मनीष सिंह थे और उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि लोगों को उनका हक मिल जाए। इसके बाद टी.इलैयाराजा कलेक्टर बनकर आए, उन्होंने भी प्रयास किए। फिर आशीष सिंह कलेक्टर बने, उनकी तरफ से सिर्फ कोशिश ही नहीं की गई, बल्कि जो प्रशासन से संबंधित कार्रवाई थी वह भी पूरी कर दी गई।

अधिकारी से लेकर नेता तक हैरान

इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि फाइल कहां अटकी है, किसी को समझ नहीं आ रहा। कलेक्टर की तरफ से कहा जाता है कि वहां का कोई काम बाकी नहीं। संभागायुक्त और वर्तमान में आईडीए अध्यक्ष दीपक सिंह को भी नहीं पता कि फाइल कहां अटकी है। वे तो बोर्ड बैठक में भी सहमति दे चुके हैं। विधायक महेंद्र हार्डिया अनगिनत बार आईडीए अधिकारियों को फोन लगा चुके हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की मंशा है कि भूमाफियाओं से पीड़ित लोगों की समस्याओं का समाधान हर हाल में हो, फिर भी आईडीए का इस तरह अड़ंगा डालना किसी को समझ नहीं आ रहा।

आईडीए ने अटका रखा है मामला

पुष्प विहार संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेंद्र कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि सभी स्तर पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है, अब पूरा मामला आईडीए स्तर पर ही अटका है। अब तक सौ से अधिक बार आईडीए के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन एनओसी की जगह आश्वासन ही मिला है। 15-20 दिन पहले आईडीए ने कहा था कि विज्ञप्ति निकाल रहे हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। विधायक महेंद्र हार्डिया कई बार हमारे सामने ही आईडीए अधिकारियों से लेकर सीएम तक को फोन लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

ऐसी कौन सी प्रोसेस, जो पूरी नहीं हो रही

इस संबंध में जब आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फाइल प्रोसेस में है। यह जवाब वे पुष्प विहार संघर्ष समिति को भी कई बार दे चुके हैं। अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि जब सब तरफ से हां हो गई है तो ना कहां से हो रही है। जब से सीएम यादव इंदौर के प्रभारी बने हैं तब से शहर विकास के कामों की गति तेज हो गई है, ऐसे में जनता से जुड़े इस काम में आखिर कौन रोड़ा बन रहा है?

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