भोपाल। सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े अंतर्राज्यीय वित्तीय विवाद का समाधान हो गया है। मंगलवार को भोपाल में हुई कैबिनेट से पहले मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को बताया कि लंबे समय से विवादों में रही नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद का समाधान हो गया है। इसके तहत मध्य प्रदेश सरकार गुजरात को 217 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी। साथ ही कर्मचारियों की पदोन्नति, आईटी पार्क, नगर वन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा से जुड़े कई अहम निर्णय भी लिए गए।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि 30-40 वर्षों से लंबित इस मामले का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया है। उन्होंने इसे चारों राज्यों के समन्वित विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। सरदार सरोवर परियोजना के कुल व्यय का 75 प्रतिशत हिस्सा गुजरात सरकार वहन करेगी। वहीं, तय फार्मूले के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार गुजरात को 217 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी।
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अब बेहतर समन्वय स्थापित होगा
उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाप्त होने से मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। नई दिल्ली में हुए इस समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। यह विवाद सरदार सरोवर परियोजना में विस्थापन, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और अन्य वित्तीय दायित्वों के बंटवारे को लेकर कई वर्षों से चला आ रहा था। अब चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट के जरिए सभी लंबित वित्तीय दावों और देनदारियों का निपटारा करने पर सहमति जताई है।
वक्फ बोर्ड के गठन वाला पहला राज्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश ने प्रशासन, संस्कृति, जल संरक्षण, खेल और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि नए अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान भारतम् योजना के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। अब तक 34.45 लाख से अधिक पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण और 12 लाख से ज्यादा का सत्यापन किया जा चुका है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का नक्शा, पन्ना से रसिक प्रिया, बुरहानपुर से 220 वर्ष पुरानी हस्तलिखित श्रीमद्भागवत और दतिया से ऐतिहासिक ताम्रपत्र जैसी धरोहरें मिली हैं।
हॉकी एशिया कप में एमपी के खिलाड़ी
जापान में आयोजित अंडर-18 हॉकी एशिया कप में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने छह स्वर्ण और चार कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवपुरी में स्थापित हो रही डिफेंस एंड एयरोस्पेस यूनिट और भोपाल के सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से 25 हजार से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
कोई भी पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित न रहे
कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने प्रदेश में करीब दस वर्ष बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभागों और जिलों में पारदर्शी तरीके से पदोन्नति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और कोई भी पात्र कर्मचारी इससे वंचित न रहे।
हर जिले में विकसित होंगे आईटी पार्क
बैठक में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के डेटा सेंटर के उन्नयन के लिए 800 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी गई है। साथ ही औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश के सभी जिलों में छोटे-छोटे आईटी पार्क विकसित किए जाएंगे और आईटी उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
डोंगला वेधशाला के लिए 39 करोड़
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से उज्जैन के निकट डोंगला स्थित खगोलीय वेधशाला के विकास कार्यों को जारी रखने के लिए 39 करोड़ रुपए के व्यय को भी मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने नगरीय विकास विभाग की नमो हरित नगर योजना को मंजूरी दी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपए की लागत से नगर वन विकसित किए जाएंगे। कैबिनेट ने हायर सेकेंडरी परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्कूटी वितरण योजना को भी पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है।
ई़-ऑक्शन पर बेचेंगे अनाज
समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अनाज के संबंध में निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार के आवंटन के बाद बचा हुआ अनाज राज्य सरकार अपने स्तर पर ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचेगी, ताकि लंबे समय तक भंडारण की समस्या न हो।कैबिनेट ने स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री पर पंचायत उपकर नहीं लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस उपकर का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इससे प्रदेश के करीब 48 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए भर्ती
प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर भर्ती करने का निर्णय लिया गया है। जहां पीएससी के माध्यम से पद नहीं भर पाए हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग स्वयं भर्ती करेगा। चयनित विशेषज्ञ डॉक्टरों को कम से कम तीन वर्ष तक एक ही स्थान पर सेवाएं देनी होंगी।



