महापौरजी लोग पूछ रहे हैं-नो कार डे नहीं मनाओगे तब भी चलेगा, शहर में नो गड्ढा डे कब मनेगा?

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इंदौर। हर साल बारिश में शहर की डामर की सड़कें खराब होती रही हैं, लेकिन अनंत चतुर्दशी की झांकी निकलने के पहले सब सुधर जाती थीं। इस साल अनंत चतुर्दशी निकल गई, नवरात्रि कल से शुरू हो रही है और इसी माह दीपावली मन जाएगी, लेकिन शहर के गड्‌ढों का मुंह नहीं भरा। बेचारे गड्‌ढे ठहाके लगाकर लोगों के मजे ले रहे हैं। इधर, महापौर पुष्यमित्र भार्गव शहर में नो कार डे मनाने की तैयारियों में जुटे हैं।

महापौरजी, शहर के लोगों का कहना है कि एक दिन शहर में कार नहीं चलने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन गड्‌ढों से काफी फर्क पड़ रहा है। हर दिन लोग उसमें गिरकर अपने हाथ-पांव तुड़वा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जितनी ताकत आप नो कार डे मनाने में लगा रहे हैं अगर उतनी ही गंभीरता से सड़कों के गड्‌ढे भरवा देते तो शहर और यहां के लोगों का भला हो जाता।

अब तो सीमेंट की सड़कों पर गड्‌ढे हैं

लोग कह रहे हैं कि पहले शहर में सिर्फ डामर की सड़कें थीं, तब बारिश में गड्‌ढे हो जाते थे। अब तो सीमेंट की सड़कों का पूरे शहर में जाल बिछा है। अब क्या कारण है कि गड्‌ढे हो रहे हैं। महापौरजी, लोग पूछ रहे हैं कि आखिर आपकी प्लानिंग में ऐसी क्या गड़बड़ी है कि नई बनी सड़कों को भी कभी पाइप लाइन डालने, तो कभी किसी और काम के लिए खोद दिया जाता है। खास बात यह कि खोदने के बाद यह महीनों तक ऐसी ही पड़ी रहती हैं। जब जनता चिल्लाती है तो आपके ठेकेदार कामचलाऊ रिपेयरिंग कर भाग खड़े होते हैं और जनता इन्हीं गड्ढों में हिचकोले खाती रहती है।

गड्‌ढों में ही हो रही गरबे की प्रैक्टिस

महापौरजी, सोशल मीडिया पर लोगों ने बहुत सारे मीम्स डाले हैं। लोग कह रहे हैं कि जब वे दोपहिया वाहन से गरबे की प्रैक्टिस करने जाते हैं तो सड़कों के गड्‌ढों में ही प्रैक्टिस हो जाती है। लोग आपको इसके लिए धन्यवाद भी दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर आपको गड्‌ढा मित्र भी करार दिया गया है।

ट्रैफिक मित्र बने तो हुआ कबाड़ा

लोग तो यह भी कह रहे हैं कि पता नहीं अपने महापौर को क्या हो गया है, वे जहां भी हाथ डाल रहे हैं, सब गुड़-गोबर ही हो रहा है। आपने ट्रैफिक मित्र बनकर शहर की ट्रैफिक सुधारने की कोशिश की तो उसका भी कबाड़ा हो गया। जवाहर मार्ग को वन वे करने से लेकर राजवाड़ा को नो ई-रिक्शा जोन तक के सारे प्रयोग फेल हुए। लोग पूछ रहे हैं कि शहर ने आपको मित्र समझकर बंपर वोट से जितवाया, लेकिन आप मित्रता क्यों नहीं निभा पा रहे?

सिर्फ बाहर नंबर बढ़वाने से शहर का क्या भला?

अब तो भाजपा में भी कहा जा रहा है कि महापौरजी को सिर्फ बाहर यानी भाजपा आलाकमान से लेकर पूरे देश में अपना नंबर बढ़वाने की चिन्ता है। सफाई में तो अफसरों ने आपको एक बार फिर नंबर दिलवा दिया, लेकिन बाकी मामलों में तो आपको ही आगे आना होगा। अगर शहर की जनता की समस्या ही हल नहीं हो रही तो नो कार डे जैसे इवेंट कराने का क्या फायदा? वैसे भी आप जितने भी प्रकार के डे होते हैं, मनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में एक बार नो गड्‌ढा डे के बारे में भी सोच लीजिएगा?

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