इंदौर। काफी जद्दोजहद के बाद 30 जनवरी को इंदौर के भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का नाम घोषित हुआ था। फरवरी बीत गया, मार्च के दो दिन बीत गए, लेकिन बेचारे मिश्राजी विधिवत गद्दी पर नहीं बैठ पा रहे। मिश्राजी की इच्छा है कि सीएम डॉ.मोहन यादव उनकी ताजपोशी में आएं और सीएम हैं कि आने का नाम ही नहीं ले रहे।
ऐसा नहीं कि सीएम इंदौर नहीं आ रहे। 30 जनवरी से लेकर अब तक दर्जनों बार आ चुके हैं। कभी किसी की तबीयत पूछने आ जाते हैं तो कभी किसी की शादी में शामिल होते हैं, लेकिन मिश्राजी के लिए समय नहीं निकाल पा रहे। दुल्हन भी तैयार है, दूल्हा भी तैयार है, मंडप भी सजा है लेकिन फेरे दिलाने वाले पंडितजी नहीं आ रहे। कोशिश तो मिश्राजी भी लगातार कर रहे हैं। सीएम के हर दौरे में आगे-पीछे घूमते रहते हैं, लेकिन फिर भी सीएम का दिल नहीं पसीज रहा।
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बताया जा रहा है कि सीएम ने पहले 12 फरवरी के बाद का समय दिया था। इसके बाद ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में व्यस्त हो गए। इस बीच सुमित मिश्रा प्रयागराज महाकुंभ में गंगा भी नहा आए। अब मार्च शुरू हो गया है, लेकिन सीएम साहब अभी भी नहीं मान रहे। कहने वाले कह रहे हैं कि सीएम आखिर अपने सबसे विरोधी नेता के समर्थक की ताजपोशी में कैसे शामिल हों? उस नेता के जो खुलेआम मोर्चा खोलकर बैठा हो। मंत्रिमंडल में अच्छी जगह मिलने के बाद भी हर जगह विरोध करता हो।
सीएम साहब, माना कि यह सच है। आपका नाराज होना जायज है, लेकिन आखिर सुमित मिश्रा है तो संगठन का ही। आपके प्रभार वाले जिले का अध्यक्ष है, सबको साधकर चलना चाहता है। सारा गुस्सा थूक कर आ जाइए और रख दीजिए न उसके सिर पर अपना हाथ।
सीएम साहब, आपको भी पता है कि सुमित मिश्रा को गद्दी कैसे मिली। जिस नेता के कारण आप उसकी ताजपोशी में नहीं आना चाहते, उसने भी सुमित के सिर से हाथ खींच लिया था। अगर विधानसभा दो और तीन के विधायक उसके पक्ष में नहीं आते तो कोई और ही नगर अध्यक्ष बन गया होता। सुमित मिश्रा भाजपा का पुराना कार्यकर्ता है, भले ही वह किसी एक गुट में जमा हो, लेकिन शहर के अधिकांश नेता उसके पक्ष में हैं। वह पार्टी के लिए समर्पित है और उसका स्वभाव भी ऐसा नहीं है कि कोई उसे अपने डंडे से हांक ले। इसलिए भाजपा कार्यकर्ताओं की आपसे गुजारिश है कि इंदौर आ जाइए। सुमित मिश्रा की ताजपोशी करा दीजिए।
सीएम साहब, आपका दिल काफी बड़ा है। इंदौर जिले का प्रभार आपके पास होने से यहां की राजनीति भी काफी संतुलित हुई है। ऐसे में आगे भी संतुलन बनाए रखने के लिए आपका सुमित के सिर पर हाथ रखना जरूरी है। आ जाइए, सीएम साहब। आते समय यह भूल जाइए कि नगर अध्यक्ष बनने से पहले उसके सिर पर किसका हाथ था। सच मानिए, विधिवत पदभार ग्रहण नहीं करने से संगठन की खिल्ली भी उड़ रही है।


