भागीरथपुरा गंदा पानी मामला : प्रदेश में वर्षों से ‘सो’ रही कांग्रेस में पहली बार ‘उमंग’

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मध्यप्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस अब तक सरकार के खिलाफ कोई ऐसा आंदोलन नहीं खड़ा कर पाई, जिससे जनता उससे जुड़ सके। कांग्रेस को कई बार ऐसा मौका मिला भी, लेकिन वह उसका फायदा नहीं उठा पाई। इंदौर के विधानसभा एक के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के मामले में पहली बार ऐसा लगा कि कांग्रेस जिंदा है और इसका पूरा श्रेय विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को जाता है।

अब चाहे कोई लाख कह ले कि जीतू पटवारी, कैलाश विजयवर्गीय के और उमंग सिंघार, सीएम मोहन यादव के, लेकिन सिंघार ने इंदौर आकर जो कुछ भी किया, उसने कांग्रेस को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है। वह भी ऐसे समय जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी स्थानीय होने के बाद भी मैदान नहीं संभाल पाए, बात-बात पर इंदौर का दौरा करने वाले पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भागीरथपुरा तक नहीं पहुंच पाए।

उमंग सिंघार ने न केवल अपने बयानों से सरकार को घेरने की कोशिश की, बल्कि मैदान में भी नजर आए। वे भागीरथपुरा गए, पीड़ितों से बात की। हॉस्पिटल गए, गंदे पानी से बीमार लोगों का हालचाल पूछा। वे अन्य बस्तियों में गए, वहां सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने टैंकर के पानी की भी जांच की। वे पानी की टंकी पर भी चढ़ गए।

कहने वाले कह सकते हैं कि यह सब सियासी ड्रामा है, लेकिन विपक्ष में बैठा और क्या कर सकता है? उमंग सिंघार ने यह तो बता ही दिया है कि कांग्रेस जनता के साथ है। इतना ही नहीं अपनी बात की प्रमाणिकता के लिए उन्होंने हाथोंहाथ पानी के गुणवत्ता की जांच भी कर डाली।

सचमुच, इंदौर ही नहीं प्रदेश की सो रही कांग्रेस को जगाने का इससे बड़ा प्रयास नहीं हो सकता। यह भी तय है कि कांग्रेस को सरकार को घेरने के लिए इससे अच्छा मुद्दा भी नहीं मिल सकता।

ऐसे समय में जब कांग्रेस में वरिष्ठ होने का दावा करने वाले कई नेता इस मुद्दे से किनारा कर रहे हैं, उमंग सिंघार का यह प्रयास निश्चित तौर पर कांग्रेस में उमंग भर गया है।

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