इंदौर। पत्थर पर रस्सी से लकीर खींचने की कहावत सबने सुनी होगी। और यह सच भी है कि कोशिश करने से पत्थर पर लकीर भी खींची जा सकती है और बंजर जमीन में पौधे भी उगाए जा सकते हैं। अलीराजपुर कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर लंबे समय से ऐसी कोशिश में लगे हैं और आज उन्होंने सफलता का परचम भी लहरा दिया है। अलीराजपुर जैसी जगह में जहां न सरकारी जमीन है और न कोई संशाधन, कलेक्टर बेडेकर ने आज प्रदेश के प्रथम जिला स्तरीय निवेशक सम्मेलन में स्थानीय स्तर पर ही 75 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त कर लिए। इससे क्षेत्र के करीब 200 लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे उन्होंने इस कठिन डगर का सफर तय किया-
सवाल-निवेशक सम्मेलन की रूपरेखा आखिर कैसे तैयार हुई?
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जवाब-मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की मंशा के अनुसार आज निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया था। हमने यहां निवेश संवर्धन केंद्र भी बना रखा है। सम्मेलन के लिए हम लोग पिछले 15 दिन से प्रयास कर रहे थे। सरकारी अमले के साथ ग्राम पंचायतों तथा जनप्रतिनिधियों की मदद ली गई। लोगों को समझाइश दी गई कि वे चाहें तो अलीराजपुर की तकदीर बदल सकते हैं। इसका परिणाम हुआ कि आज करीब 100 व्यापारी और निवेशक आए थे।
सवाल-किस-किस तरह की परेशानियां सामने आईं?
जवाब-अलीराजपुर की समस्या है कि यहां निजी जमीन काफी कम है। सरकारी जमीन भी इतनी नहीं हैं कि बाहर का कोई व्यक्ति बड़ा उद्योग लगा सके। सभी जमीनें ट्राइबल हैं, जिन्हें कोई बाहर का व्यक्ति खरीद नहीं सकता और न ही सरकार उसका अधिग्रहण कर सकती है। यहां निजी जमीनों की कीमत 15 हजार रुपए वर्गफुट है, ऐसे में जमीन की समस्या सबसे बड़ी है। हमने लैंड बैंक भी तैयार करवाया, चांदपुर के पास सिर्फ दो एकड़ जमीन मिली। हम जिससे भी निवेश की बात करते, उनका पहला सवाल जमीन को लेकर ही होता था।
सवाल-फिर कैसे निकाला जमीन की समस्या का समाधान?
जवाब-हमने तय किया कि स्थानीय लोगों को इसके लिए राजी किया जाए। लोगों से कहा गया कि आप जिस चीज की खेती करते हो उससे जुड़ा उद्योग ही अपनी जमीन पर लगा लो। सरकार आपको कर्ज भी देगी और हर तरह से मदद भी करेगी। यहां आम, बांस से जुड़े उद्योग आसानी से लगाए जा सकते हैं। हमने आदिवासी युवकों को समझाया कि इससे अलीराजपुर के साथ ही तुम्हारा भी भला होगा। उन्हें यह भी बताया गया कि आपके गांव के जो लोग इंदौर और बाहर मजदूरी करने जाते हैं, उन्हें आप अपने उद्योग में रोजगार दे सकते हैं।
सवाल-अब आगे क्या परेशानियां आने वाली हैं, उनके बारे में कुछ सोचा है?
जवाब-लोगों का माइंडसेट बदलना होगा। सम्मेलन में ही कई लोगों ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि वे इस संबंध में कलेक्टर से बात भी कर सकते हैं। आज उनकी झिझक तोड़ी गई। यह सिलसिला जारी रहेगा। वे क्या खुद क्या चाहते हैं, सरकार और प्रशासन से क्या मदद चाहिए यह जानना जरूरी है।
सवाल-स्थानीय लोगों ने और क्या समस्या बताई?
जवाब-लोगों का कहना था कि वे भी अलीराजपुर के विकास में सहयोग देना चाहते हैं, लेकिन यहां संसाधन नहीं है। लोगों ने कहा कि उनके बच्चे इंदौर में इंजीनियरिंग और मेडिकल पढ़ने जाते हैं। यहां अगर ऐसी सुविधा होती तो यहीं पढ़ाई करते और यहीं काम भी करते। हमने उन्हें कह दिया कि सरकार यहां के विकास को लेकर काफी गंभीर है और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप ही यह आयोजन हो रहा है।
सवाल-आज के सम्मेलन का प्रारब्ध क्या रहा, धरातल पर कब तक आएंगे?
जवाब-सम्मेलन में 90 से अधिक निवेशकों ने 75 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की कार्य योजना प्रस्तुत कर नई इकाइयां लगाने की इच्छा जताई। 14 निवेशकों से वन टू वन चर्चा करके उसकी कार्य योजना एवं निवेश करने में आ रही परेशानियों का निराकरण किया गया। उम्मीद है कि ये सारे प्रस्ताव जल्द ही जमीन पर दिखाई देंगे।



