नई दिल्ली। अब तक हर चुनाव में दमदारी से भाजपा नेतृत्व ने उम्मीदवारों की सूची जारी की है और इसमें फेरबदल की संभावना काफी कम ही बनती रही है, लेकिन इस बार पार्टी टिकट वितरण में उलझती नजर आ रही है। रविवार को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में पीएम मोदी, जेपी नड्डा और अमित शाह समेत कई दिग्गज नेताओं ने भारी मंथन के बाद उम्मीदवारों के नाम तय किए। सोमवार को पहले चरण की लिस्ट एक्स पर जारी की लेकिन तुरंत ही इसे डिलीट कर दूसरी लिस्ट जारी करनी पड़ी।
सोमवार को भाजपा ने 44 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। हालांकि कुछ समय बाद ही इस लिस्ट को वापस ले लिया गया था। इसमें पहले चरण के 15, दूसरे चरण के दस और तीसरे चरण के 19 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई थी। इस लिस्ट के जारी होते ही भाजपा में बवाल मच गया। टिकट नहीं मिलने वाले भाजपा नेताओं के समर्थक अपने उम्मीदवार के लिए टिकट की मांग को लेकर जम्मू स्थित भाजपा कार्यालय पर जमकर हंगामा किया।
सोमवार सुबह आई पहली लिस्ट में पूर्व डिप्टी सीएम निर्मल सिंह को टिकट नहीं दिया गया था। 2014 में निर्मल सिंह ने बिलावर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इनके साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता को भी टिकट नहीं मिला था। बताया जा रहा है कि उनका नाम अगली सूची में हो सकता है। इस सूची में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना का भी नाम नहीं था।
कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद दो घंटे बाद भाजपा ने पहले चरण के 15 उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी की। इस लिस्ट के बाद रविंद्र रैना ने कहा कि पार्टी का फोकस अभी 18 सितंबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव पर है। तीन घंटे बाद ही बीजेपी ने एक और लिस्ट जारी की जिसमें सिर्फ एक ही उम्मीदवार का नाम था। भाजपा ने जम्मू कश्मीर के कोकरनाग सीट से रोशन हुसैन गुर्जर को टिकट दिया है यानी कि अब तक कुल 16 उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है।
भाजपा ने कहा टाइपिंग एरर था
भारतीय जनता पार्टी ने 44 उम्मीदवारों की लिस्ट डिलीट करने पर सफाई दी है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि पहली लिस्ट को टाइपिंग एरर की वजह से रद्द कर दिया गया। दरअसल, पहली लिस्ट में ओमी खजुरिया का नाम शामिल नहीं था और उन्हीं के समर्थक पार्टी दफ्तर में नारे लगा रहे थे।
बगावत से बचने के लिए लिया फैसला
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पहले चरण की सूची जारी होने के बाद मचे बवाल से बगावत का अंदेशा होने लगा। इसके बाद भाजपा ने तय किया कि चरणवार सूची जारी की जाए। तब तक असंतुष्टों को समझा भी लिया जाएगा और चुनाव पर कम असर पड़ेगा।