सिंधु जल संधि निलंबन के बाद भारत का बड़ा दांव: चिनाब पर दुलहस्ती-2 परियोजना को मंजूरी, पाकिस्तान को कड़ा रणनीतिक संदेश

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सिंधु जल संधि निलंबन के बाद भारत का बड़ा दांव: चिनाब पर दुलहस्ती-2 परियोजना को मंजूरी, पाकिस्तान को कड़ा रणनीतिक संदेश

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत ने पाकिस्तान को एक और बड़ा रणनीतिक संकेत दिया है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में चिनाब नदी पर दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दे दी है। 3,200 करोड़ रुपये की इस परियोजना को बिजली उत्पादन के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

India Indus Water Canal Diversion Pakistan Water Crisis 113km Project - सिंधु  जल संधि पर भारत की नई रणनीति: 113 किमी लंबी नहर से पानी होगा डायवर्ट,  पाकिस्तान बूंद-बूंद को ...

जलविद्युत परियोजनाओं के लिए गठित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने इस महीने की शुरुआत में इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को स्वीकृति दी, जिससे निर्माण निविदाएं जारी करने का रास्ता साफ हो गया है। रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना का मतलब है कि बिना बड़े बांध बनाए और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोके बिना बिजली का उत्पादन किया जाएगा।

दुलहस्ती-2, मौजूदा 390 मेगावाट क्षमता वाली दुलहस्ती चरण-एक परियोजना का विस्तार है। नए चरण के तहत लगभग 258 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस फैसले को रणनीतिक रूप से अहम इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है, जब सिंधु जल संधि प्रभावी रूप से 23 अप्रैल 2025 से निलंबित है।

ईएसी ने परियोजना के मापदंड 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप तय किए हैं, हालांकि समिति ने यह भी दर्ज किया कि संधि फिलहाल निलंबित है। पाकिस्तान लंबे समय से चिनाब नदी पर भारत की किसी भी परियोजना का विरोध करता रहा है। संधि के तहत चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों के पानी पर पाकिस्तान का मुख्य अधिकार माना जाता है, लेकिन भारत को इन नदियों पर रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएं बनाने का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त है।

दुलहस्ती-2 को मिली मंजूरी यह साफ संकेत देती है कि भारत अब पाकिस्तान की आपत्तियों की परवाह किए बिना अपनी सीमाओं के भीतर जल संसाधनों का उपयोग करेगा। चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान की कृषि के लिए बेहद अहम है, और भारत की ओर से ऊपरी हिस्सों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से इस्लामाबाद को यह आशंका है कि भविष्य में किसी भी तनाव की स्थिति में भारत जल प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता हासिल कर सकता है।

सिंधु जल संधि के स्थगन के बाद केंद्र सरकार सिंधु बेसिन में कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ा रही है। इनमें सावलकोट, रतले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई चरण-एक जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। यह पूरी रणनीति स्पष्ट करती है कि आतंकवाद और जल संसाधनों के मुद्दे पर भारत अब किसी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।

Abhilash Shukla (Editor)
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