नई दिल्ली। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सेना के खिलाफ बयान देकर घिर गए हैं। फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू–कश्मीर में सेना पर आतंकवादियों केसाथ मिलीभगत के आरोप लगाए थे। सेना मुख्यालय के सूत्रों ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह है। इस आरोप में न केवल तथ्यों का अभाव है बल्कि ये उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं का भी अपमान है जो देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
सेना ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी राजनीति से प्रेरित लगती है। हमारी सीमाओं को सुरक्षाबलों ने और भी अधिक सुरक्षित किया है। सेना की सीधी निगरानी वाले क्षेत्रों में घुसपैठ की कोई भी कोशिश सफल नहीं हो सकी है। 2019 में आतंकवादियों की घुसपैठ की 219 कोशिशें की थीं लेकिन पिछले साल यह संख्या घटकर सिर्फ 48 रह गई। इस साल शून्य पर आ चुकी है। जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर सेना मुख्यालय के सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना मजबूती के साथ सीमा की रक्षा कर रही है। हाल के वर्षों में जम्मू–कश्मीर की स्थिति में काफी सुधार भी हुआ है।
👉 यह भी पढ़ें:
- पहलगाम आतंकी हमले के बाद फारूक अब्दुल्ला का दौरा, उमर अब्दुल्ला ने पर्यटन पुनर्जीवन के लिए संभाला मोर्चा
- सिंधु जल संधि पर फ़ारूक अब्दुल्लाह की भारत सरकार से अपील:
- पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान पर भड़के फारूख अब्दुल्ला, कहा- आज देश ऐसी कार्रवाई चाहता है कि फिर कभी इस तरह के हमले न हों
- सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है आतंकी हमले; फारुक अब्दुल्लाह


