वैश्विक तनावों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, विश्व बैंक ने जताई 7.2% वृद्धि की उम्मीद
विश्व बैंक ने कहा है कि बढ़ते वैश्विक व्यापारिक तनावों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। मजबूत घरेलू मांग के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
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विश्व बैंक की ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मजबूत आर्थिक रफ्तार ने न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र को भी आगे बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें भारत की भूमिका अहम रही है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आकलन में पाकिस्तान और अफगानिस्तान को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इन्हें मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में वर्गीकृत किया गया है।
विश्व बैंक के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह मजबूत घरेलू मांग है। टैक्स नीतियों में किए गए सुधारों और बदलावों से ग्रामीण आय में वृद्धि हुई है, जिससे उपभोग और निवेश को बल मिला है।
हालांकि रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर अमेरिका भारत पर इसी तरह टैरिफ लगाता रहा, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर घटकर 6.5 प्रतिशत हो सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में इसके फिर से बढ़कर 6.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके बावजूद विश्व बैंक का मानना है कि अमेरिका द्वारा निर्यात पर अधिक टैरिफ लगाए जाने का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीमित असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग पर आधारित है, जो आने वाले वर्षों में भी विकास की रफ्तार बनाए रखेगी।



