नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले में शनिवार को तीन दिनी विक्रमोत्सव की शुरुआत हुई। इसमें सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव की सराहना करते हुए कहा कि आप सिर्फ नाम से नहीं, हर दृष्टि से मनमोहन हैं। आपने दिल्ली के दिल पर असर छोड़ा है। आपकी सांस्कृतिक सोच और नाट्य प्रेम इस आयोजन में झलकता है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति अंतहीन है। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगू भाई पटेल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हुए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत लंबे अंतराल के बाद एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। आर्थिक प्रगति, वैश्विक सराहना और मजबूत संस्थागत ढांचे के साथ देश अब सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है जिसकी सांस्कृतिक विरासत 5 हजार साल पुरानी हो।ऐसे में यह आवश्यक है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से आत्मबोध को सशक्त करें। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को न्याय और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि जिस आदर्श शासन की कल्पना उस युग में की गई थी, आज वह आधुनिक भारत की शासन-प्रणाली में मूर्त रूप ले रहा है।
हर क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक समय था जब अंग्रेजी को केवल क्वालिफाइंग सब्जेक्ट के रूप में रखा गया था, लेकिन 2009 में आई सरकार ने इसे फिर से रैंकिंग सब्जेक्ट बना दिया। उन्होंने इस बदलाव को भारतीय भाषाओं के सम्मान के खिलाफ बताया। अब हर क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिल रहा है। संसद में 22 भाषाओं का उपयोग होता है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इंडियन क्लासिकल लैंग्वेज को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा मिल रही है।
जन्म से लेकर सम्राट बनने तक का सफर
सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का में विक्रमादित्य के जन्म से लेकर सम्राट बनने तक की सभी गाथाएं प्रस्तुत की गई। नाटक में 125 कलाकारों और 50 सहयोगियों के माध्यम से विक्रमादित्य की गौरव गाथा प्रदर्शित की गई। महानाट्य का मंचन 14 अप्रैल तक नई दिल्ली के लाल किले में माधवदास पार्क में होगा। नाट्य मंचन के दौरान महान सम्राट विक्रमादित्य, विक्रम संवत् और देश के गौरवशाली इतिहास में उनके योगदान से देश को अवगत करवाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने भी किया संबोधित
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत के उस स्वर्णिम युग का उत्सव है, जिसने न्याय, संस्कृति, विज्ञान और धर्म के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ऐसे आदर्श शासक थे, जिन्होंने सिद्ध किया कि राजा वही होता है जो प्रजा के हित में जिए और न्याय को सर्वोपरि रखे। उनके दरबार में महाकवि कालिदास, खगोलशास्त्री वाराहमिहिर और वैद्य धन्वंतरि जैसे नवरत्न थे, जो भारत की सांस्कृतिक उत्कृष्टता के प्रतीक हैं।
सीएम यादव ने कहा-संस्कृति का अंत नहीं
मप्र के सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लाल किले का ये प्रांगण और इतना सुखद संयोग है कि इस ऐतिहासिक किले के एक-एक पत्थर की इमारत भारत के गौरवशाली अतीत के लिए सीना ताने खड़ी है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, जिसके कारण से गौरवान्वित होता है, ऐसे यशस्वी भारत माता की ये राजधानी और दुनिया के सबसे सक्षम जनतांत्रिक देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पधारे हैं, मैं उनका आभारी हूं। सीएम ने कहा कि ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है जब आक्रांताओं ने भारत की मान मर्यादा के लिए लोक-लालच से संस्कृति को अलग प्रकार से देखने के कारण हर काल में इस संस्कृति को चुनौती दी। हम भाग्यशाली है और सौभाग्यशाली है, हमारे वीरों ने अपने इस काल को हमेशा भारत की आन बान शान को लगा करके दुनिया के सामने उस तथ्य को स्थापित किया और इसी लिए कहा गया है कि इस संस्कृति का अंत नहीं हो सकता है।
दिल्ली के सीएम ने बताया गौरवशाली क्षण
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुए कहा कि मैं उनके प्रति धन्यवाद प्रकट करना चाहती हूं, जिन्होंने इतना भव्य आयोजन दिल्ली में किया और दिल्ली वासियों को समृद्ध भारतीय संस्कृति, उज्जैन की गुफाएं और सम्राट विक्रमादित्य जैसे गौरवशाली महानायक को नजदीक से जानने और देखने का अवसर दिया। आज का यह गौरवशाली क्षण हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।
लालकिले में सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सीएम मोहन यादव को बताया मनमोहन, सीएम ने कहा-सनातन संस्कृति अंतहीन
लालकिले में सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सीएम मोहन यादव को बताया मनमोहन, सीएम ने कहा-सनातन संस्कृति अंतहीन
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