नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में अब फायर ब्रिगेड ने कहा है कि उनके घर से कोई कैश नहीं मिला है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी सफाई पेस की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गलत जानकारी और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इस मामले में कॉलेजियम ने प्रेस में बयान जारी किया और कहा कि जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अभी इस मुद्दे पर संबंधित जजों और खुद जस्टिस वर्मा से जवाब मांगा गया है, जिसका परीक्षण करने के बाद फैसला लिया जाएगा। जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में दूसरे सबसे सीनियर जज हैं और कॉलेजियम के सदस्य भी हैं। उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट, यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है। वहां वे वरिष्ठता में नौवें स्थान पर होंगे। यह प्रस्ताव इन–हाउस जांच प्रक्रिया से अलग है।
👉 यह भी पढ़ें:
- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, दिल्ली के आवास में जले हुए नोट मिलने के बाद आए थे विवादों में
- इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए बनी कमेटी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने घोषित किए सदस्यों के नाम
- सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिका की खारिज, जले हुए नोटों के मामले में जांच की वैधता को दी थी चुनौती
- लोकसभा में जल्द शुरू होने जा रही है जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया, संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने कहा-सभी दल सहमत
- दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस वर्मा का दावा- स्टोररूम में रखी नकदी उनके या उनके परिवार की नहीं, सुप्रीम कोर्ट पहुंची जांच रिपोर्ट
फायर विभाग ने कहा– नकदी नहीं मिली
उल्लेखनीय है कि जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे जब उनके आवास पर आग लग गई, जिसके बाद उनके परिवार ने फायर ब्रिगेड को बुलाया। कहा जा रहा है कि आग पर काबू पाने के बाद, फायर कर्मियों को एक कमरे के अंदर बड़ी मात्रा में नकदी मिली। हालांकि, दिल्ली फायर सर्विसेज के चीफ अतुल गर्ग ने पीटीआई को बताया कि फायर फाइटरों को वर्मा के आवास पर आग बुझाने के दौरान कोई नकदी नहीं मिली।
जांच के बाद पारित होगा प्रस्ताव
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने 20 मार्च को कॉलेजियम की बैठक से पहले जांच शुरू कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आज चीफ जस्टिस को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके बाद, रिपोर्ट की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह प्रस्ताव 20 मार्च को सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जजों की कॉलेजियम ने जांचा था। इसके बाद, शीर्ष अदालत के परामर्शदाता जजों, संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस यशवंत वर्मा को पत्र लिखे गए थे। बयान में कहा गया है कि प्राप्त जवाबों की जांच की जाएगी और उसके बाद कॉलेजियम एक प्रस्ताव पारित करेगा।



