भाजपा के लिए राजग में सीटों का बंटवारा कठिन परीक्षा : चिराग पासवान के तेवर से बढ़ी भाजपा की मुश्किलें
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजग (NDA) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान इस बार भी अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं और भाजपा के मौजूदा ऑफर से संतुष्ट नहीं दिख रहे।

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पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग ने नीतीश कुमार की रोशनी मद्धिम कर दी थी, और इस बार भी उनकी राजनीतिक सक्रियता ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में चिराग का फोन भाजपा नेताओं की पहुंच से बाहर बताया गया — “आउट ऑफ रीच” यानी संपर्क नहीं हो पा रहा।
शाह की एंट्री से सुलझने लगे समीकरण
भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े चिराग से संपर्क नहीं बना पा रहे थे। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप किया। शाह ने अपनी शैली में चिराग तक संदेश पहुंचाया, जिसके बाद तनाव कुछ कम हुआ है।
चिराग की मांग और भाजपा की दुविधा
चिराग पासवान करीब 40 सीटों की मांग पर अड़े हैं। इनमें गोविंदगंज, ब्रह्मपुर, अतरी, महुआ और सिमरी बख्तियारपुर जैसी पांच प्रमुख सीटें शामिल हैं। इनमें से तीन पर जदयू भी दावा छोड़ने को तैयार नहीं है।
लोजपा ने दबाव बढ़ाने के लिए यह भी ऐलान किया कि वह 243 सीटों पर तैयारी कर रही है।
2020 के चुनाव में चिराग ने गठबंधन से अलग राह चुनकर नीतीश कुमार को कड़ी चुनौती दी थी, जिससे कई राजग उम्मीदवारों का खेल बिगड़ा था।
अमित शाह ने दिल्ली में बिहार कोर कमेटी की बैठक में साफ कहा कि
2020 जैसी गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए।
भाजपा की रणनीति और सीटों का समीकरण
भाजपा चाहती है कि राजग की एकता बनी रहे, क्योंकि दलित और युवा वोट बैंक में चिराग की मजबूत पकड़ है। हालांकि, भाजपा चिराग की सीटों की मांग को “अतार्किक” मान रही है।
उधर, भाजपा और जदयू के बीच 101-102 सीटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन लोजपा (रामविलास), हम (जीतन राम मांझी) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों की मांगें इस संतुलन को जटिल बना रही हैं।
चिराग के बढ़ते राजनीतिक संकेत
पटना की सड़कों पर अब अगला मुख्यमंत्री – चिराग पासवान वाले पोस्टर लग चुके हैं, जो उनके बढ़ते राजनीतिक आत्मविश्वास को दिखाते हैं।
हालांकि, अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि चिराग अंततः मान जाएंगे।
फिलहाल, भाजपा के लिए राजग में सीटों का बंटवारा सबसे कठिन परीक्षा बनता जा रहा है —
क्योंकि उम्मीद और समाधान के बीच का सफर, बिहार की राजनीति में हमेशा लंबा साबित होता है।



