सोने के बढ़ते आयात और व्यापार घाटे को लेकर चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने अब बिना शुल्क आने वाले सोने के नियमों को और सख़्त कर दिया है। सोने के आभूषणों का विदेशों में निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए नई व्यवस्था लागू करते हुए सरकार ने आयात से लेकर निगरानी तक कई बड़े बदलाव किए हैं।
विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार अब एक अनुमति पत्र पर अधिकतम सौ किलोग्राम सोना ही आयात किया जा सकेगा। पहले इस सीमा को लेकर नियम काफी नरम माने जाते थे, लेकिन अब सरकार ने इस पर स्पष्ट सीमा तय कर दी है।
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नई व्यवस्था में पहली बार आवेदन करने वाले कारोबारियों के लिए कारखानों और सुविधा केंद्रों का निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना शुल्क आयात किया गया सोना केवल तय निर्यात कार्यों में ही उपयोग हो और उसका दुरुपयोग न हो सके।
पहले से काम कर रहे निर्यातकों के लिए भी नियम कड़े किए गए हैं। अब नई अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने पुराने निर्यात दायित्व का कम से कम आधा हिस्सा पूरा करना होगा। यानी जिन कंपनियों ने पहले तय लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं, उन्हें आगे अनुमति मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक और बड़ा बदलाव किया है। अब निर्यातकों को हर पंद्रह दिन में अपनी गतिविधियों की जानकारी सरकार को देनी होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि आयात किया गया सोना कहां और किस काम में इस्तेमाल हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब सोने के आयात पर सख़्त नियंत्रण चाहती है। हाल के महीनों में बढ़ते आयात के कारण व्यापार घाटा बढ़ने की चिंता लगातार सामने आ रही थी। इसी वजह से सरकार नियमों को चरणबद्ध तरीके से कठोर बना रही है।
कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया था। अब नए नियम लागू होने के बाद सोने के कारोबार से जुड़े उद्योगों में हलचल तेज हो गई है। कारोबारियों का मानना है कि इससे आयात प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक कठिन और निगरानी वाली हो जाएगी।



