मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। ऐसे में अब केंद्र सरकार ने उग्रवादी समूहों के खिलाफ सख्त और व्यापक योजना बनाने की तैयारी की है। माओवादी प्रभावित क्षेत्रों की तर्ज पर अब मणिपुर में भी उग्रवादियों की चारों ओर से घेराबंदी की जाएगी।
नई योजना के तहत राज्य में तैनात सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जबकि सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स के जवान सेना के साथ मिलकर नई भूमिका में नजर आएंगे। सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त कार्रवाई को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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भारत-म्यांमार सीमा से लगे इलाकों में घुसपैठ पर कड़ी नजर रखी जाएगी और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर भी सख्त कार्रवाई होगी। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में 300 से अधिक बुलेटरोधी बख्तरबंद गाड़ियां तैनात की जाएंगी। साथ ही माओवादी प्रभावित इलाकों से प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की टुकड़ियों को भी मणिपुर भेजा जाएगा, जिनमें विशेष प्रशिक्षण प्राप्त दल शामिल होंगे।
योजना के तहत कम दूरी पर अग्रिम संचालन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे उग्रवादी समूहों को दो तरफ से घेरा जा सके। एक ओर सीमा क्षेत्र से उनकी आपूर्ति शृंखला को खत्म किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा बल लगातार दबाव बनाकर उन्हें कमजोर करेंगे।
जानकारी के अनुसार, इस नई रणनीति का उद्देश्य ऐसा तंत्र तैयार करना है, जिससे उग्रवादियों को कहीं भी छिपने का मौका न मिले। भारत-म्यांमार सीमा पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया जाएगा। सेना और सीमा सुरक्षा बल सीमाओं पर तैनात रहेंगे, जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, असम राइफल्स और स्थानीय पुलिस मिलकर अंदरूनी क्षेत्रों में उग्रवादियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करेंगे।


