राज्यसभा की सीट छोड़कर आखिर किसका खेल बिगाड़ना चाहते हैं दिग्विजय सिंह, कहीं यह-खाऊंगा नहीं तो खाने भी नहीं दूगा का दांव तो नहीं?

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भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने घोषणा कर दी है कि वे इस बार राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। दिग्विजय सिंह को जानने वाले नेता कह रहे हैं कि यह फैसला जितना सीधा दिख रहा है, उतना है नहीं। कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय ने यह फैसला काफी सोच समझकर लिया है और इसके बहाने वे कई निशाने साध रहे हैं।

कांग्रेस में तो इस बात की चर्चा लंबे समय से है कि इस बार दिग्विजय सिंह को मौका नहीं मिलने वाला है। आलाकमान से उनके संबंधों पर भी चर्चा लगातार हो रही है। कभी राहुल गांधी को नसीहत देकर तो कभी संगठन के मामले में आरएसएस की प्रशंसा कर दिग्विजय सिंह पार्टी हाईकमान को संदेश देते रहे हैं। हाल ही में वे तब चर्चा में आए, जब सीडब्ल्यूसी की बैठक से ठीक पहले लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे नरेंद्र मोदी का फोटो पोस्ट कर संघ की संगठनात्मक क्षमता की तारीफ कर डाली।

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खाऊंगा नहीं तो खाने भी नहीं दूंगा

दिग्विजय सिंह ने अपने त्याग की घोषणा करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी सीट पर कोई दलित या आदिवासी को जाना चाहिए। अब माहौल कुछ इस तरह का बनाया जा रहा है कि यदि कांग्रेस किसी ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया को भेजती है, तो भाजपा कहेगी कि कांग्रेस ने दलित की सीट छीन ली। यदि किसी ओबीसी जैसे अरुण यादव या जीतू पटवारी को भेजती है, तो एससीएसटी वर्ग नाराज होगा। इसका साफ अर्थ है कि दिग्विजय सिंह ने खाऊंगा नहीं तो खाने भी नहीं दूंगा की रणनीति अपनाई है।

कमलनाथ पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

दिग्विजय सिंह के इस दांव का सबसे ज्यादा असर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर पड़ेगा। विधानसभा चुनाव में करारी हार और उसके बाद छिंदवाड़ा में बेटे नकुलनाथ की हार के बाद कमलनाथ फिर दिल्ली जाना चाहते हैं। कांग्रेस के सूत्र कह रहे हैं कि कमलनाथ ने इसके लिए कोशिश भी शुरू कर दी थी कि वे राज्यसभा के माध्यम से दिल्ली में जम जाएं। अब दिग्विजय सिंह ने उनका पूरा खेल बिगाड़ दिया है।

प्रदेश के कई नेताओं की नींद हराम

दिग्विजय सिंह के इस दांव से मध्यप्रदेश के कई ऐसे नेताओं की नींद हराम हो गई है, जो राज्यसभा में जाने की कोशिश में लगे थे। इसमें अपनी विधानसभा हार कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने जीतू पटवारी, अरुण यादव मीनाक्षी नटराजन, अजय सिंह सहित कई नेता शामिल हैं। इनमें कई और ऐसे नेता शामिल हैं, जो कई सालों की दिल्ली जाने के लिए छटपटा रहे हैं।

दिग्वजिय सिंह ने ऐसे बिछाई बिसात

दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अगर एससी समुदाय का कोई व्यक्ति कभी मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें खुशी होगी। दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी का हवाला देते हुए अहिरवार ने कहा कि मध्य प्रदेश की लगभग 17 प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी की उम्मीदों को आपके सामने रखते हुए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि इस बार राज्यसभा में एससी कैटेगरी से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे। अहिरवार के अनुरोध पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। अब दिग्विजय सिंह ने चालाकी से आलाकमान को उलझा दिया है।

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