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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर फिर निशाना साधा है। मंगलवार को एक बार फिर उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एसाईआर के आंकड़ों में नामों की विसंगति को दूर करने के लिए भाजपा के एआई टूल का इस्तेमाल किया। उन्होंने ड्राफ्ट लिस्ट भाजपा कार्यालय में बनाने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के दौरान जिन शादीशुदा महिलाओं ने अपना उपनाम बदला, चुनाव आयोग ने उनके नाम हटा दिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाब देना चाहिए कि वह आधे मतदाताओं के नाम कैसे हटा सकते हैं और यह कैसे तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और बिना कारण बताए एकतरफा तरीके से नाम हटा रहा है। उन्होंने आगे कहा, चुनाव आयोग व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर के नियम बदल रहा है।
निवास प्रमाण पत्र की अनुमति क्यों नहीं?
ममता ने कहा कि एसआईआर के नियमों के अनुसार सूक्ष्म–पर्यवेक्षक (माइक्रो–ऑब्जर्वर) की अनुमति नहीं है, फिर भी इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया। बिहार के एसआईआर में निवास प्रमाण पत्र की अनुमति है, तो बंगाल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा, तथ्यात्मक असंगति मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, इसे बाद में जोड़ा गया।
एसआईआर से अब तक 84 लोगों की मौत
ममता बनर्जी ने कहा है कि एसआईआर की वजह से अब तक बंगाल में 84 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 17 लोगों की मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई और 4 लोगों ने आत्महत्या कर ली। ममता ने दावा किया कि इन सभी लोगों की मौत एसआईआर नोटिस मिलने के बाद हुई है। उन्होंने कहा कि 54 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उन्हें अपना पक्ष तक नहीं रखने दिया गया। चुनाव आयोग अभी और एक करोड़ लोगों के नाम काटने की तैयारी में है।



