कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर फिर निशाना साधा है। मंगलवार को एक बार फिर उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एसाईआर के आंकड़ों में नामों की विसंगति को दूर करने के लिए भाजपा के एआई टूल का इस्तेमाल किया। उन्होंने ड्राफ्ट लिस्ट भाजपा कार्यालय में बनाने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के दौरान जिन शादीशुदा महिलाओं ने अपना उपनाम बदला, चुनाव आयोग ने उनके नाम हटा दिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाब देना चाहिए कि वह आधे मतदाताओं के नाम कैसे हटा सकते हैं और यह कैसे तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और बिना कारण बताए एकतरफा तरीके से नाम हटा रहा है। उन्होंने आगे कहा, चुनाव आयोग व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर के नियम बदल रहा है।
👉 यह भी पढ़ें:
- ज्ञानेश कुमार जी, क्या आपके सहकर्मी भी विपक्ष की तरह झूठ बोल रहे?
- दिल्ली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: 47.7 लाख नाम बाहर, 30 सितंबर तक ऐसे जुड़वाएं अपना नाम
- TMC नेता आशीष बनर्जी की मौत: रामपुरहाट में आवास के पास पार्टी कार्यालय से मिला शव, जांच जारी
- ममता बनर्जी की गाड़ी पर कीचड़-पत्थर फेंके जाने की घटना से बंगाल की राजनीति गरम, भाजपा ने आरोपों से किया किनारा
- West Bengal में ममता बनर्जी के काफिले पर हमला, लोगों ने गाड़ी पर पानी, पत्थर और जूते फेंके
- Mamata Banerjee को एक और झटका, टीएमसी सांसद कोयल मल्लिक ने दिया राज्यसभा से इस्तीफा
निवास प्रमाण पत्र की अनुमति क्यों नहीं?
ममता ने कहा कि एसआईआर के नियमों के अनुसार सूक्ष्म–पर्यवेक्षक (माइक्रो–ऑब्जर्वर) की अनुमति नहीं है, फिर भी इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया। बिहार के एसआईआर में निवास प्रमाण पत्र की अनुमति है, तो बंगाल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा, तथ्यात्मक असंगति मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, इसे बाद में जोड़ा गया।
एसआईआर से अब तक 84 लोगों की मौत
ममता बनर्जी ने कहा है कि एसआईआर की वजह से अब तक बंगाल में 84 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें 17 लोगों की मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई और 4 लोगों ने आत्महत्या कर ली। ममता ने दावा किया कि इन सभी लोगों की मौत एसआईआर नोटिस मिलने के बाद हुई है। उन्होंने कहा कि 54 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। उन्हें अपना पक्ष तक नहीं रखने दिया गया। चुनाव आयोग अभी और एक करोड़ लोगों के नाम काटने की तैयारी में है।



