राहुल गांधी का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा। यह बयान हाल ही में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया और फॉर्म 6 में बदलावों को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विपक्ष का विरोध
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘देशद्रोही’ करार देते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफा देना होगा। उन्होंने पीएम मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत पर भी देश की लोकतंत्र व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर 2026 को संसद से निर्वाचन सदन तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला।
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इस मार्च के दौरान पुलिस ने सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोप में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। विपक्ष ने आकाशवाणी भवन के पास धरना भी दिया, जहां पुलिस ने अनाधिकृत प्रवेश के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।

स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) विवाद और फॉर्म 6 में बदलाव
चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया और फॉर्म 6 में किए गए संशोधनों को लेकर विवाद गहराया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में सामने आया कि चुनाव आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने 14 मौकों पर डेटा मैनेजमेंट और वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं पर आपत्तियां जताई थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
इस विवाद को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि ऐसे बदलावों से वोटरों की सूची में गड़बड़ी हो सकती है और चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
विपक्षी दलों का संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने का प्रयास
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। उनका दावा है कि इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल होगी और लोकतंत्र की रक्षा होगी।
हालांकि, यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है क्योंकि इसके लिए संसद में पर्याप्त समर्थन और नियमों का पालन आवश्यक होगा।
चुनाव आयोग की सफाई और आंतरिक मतभेदों का खंडन
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को गलत बताया और अपनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया।
आयोग ने कहा कि चुनाव प्रणाली की मजबूती के लिए यह आवश्यक कदम थे और उन्होंने किसी भी प्रकार के पक्षपात या गड़बड़ी से इंकार किया है।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई घटनाएं
6 अक्टूबर को विपक्षी दलों के द्वारा आयोजित मार्च और प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी ने हाथ में तख्ती लेकर विरोध जताया, जिस पर लिखा था “Gyanesh, it’s done bro. Time to resign”। उन्होंने मीडिया से कहा कि देश में वोटों की चोरी हो रही है और चुनाव प्रणाली टूट रही है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
आम जनता और लोकतंत्र पर इस विवाद का प्रभाव
इस विवाद का असर आम जनता के मताधिकार और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। अगर चुनाव आयोग पर आरोप सही साबित होते हैं तो देश की चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप चुनावों में भागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थानों की अहमियत प्रभावित हो सकती है।
वहीं, अगर आरोप बेबुनियाद साबित होते हैं तो यह राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जाएगा। फिलहाल, इस मामले की जांच और राजनीतिक प्रक्रिया जारी है, जिससे आगामी दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी।



