इंदौर के मांगलिया क्षेत्र में जैन मंदिर से चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है, जो मंदिर से चोरी की गई अष्टधातु की मूर्तियों को जमीन में छुपा कर रखा था। यह कार्रवाई इंदौर पुलिस की तत्परता और जांच टीम की सफलता को दर्शाती है।
मांगलिया के जैन मंदिर में हुई चोरी की घटना
16 सितंबर 2026 की देर रात इंदौर के क्षिप्रा थाना क्षेत्र के मांगलिया पुलिस चौकी के अंतर्गत स्थित “ऋषि तीर्थ स्थल” जैन मंदिर में चोरी हुई। इस घटना में मंदिर की 54 वर्ष पुरानी तीन अष्टधातु की मूर्तियां—भगवान महावीर, भगवान आदिनाथ और भगवान अरहनाथ—चोरी हो गईं। इसके साथ ही पूजा सामग्री जैसे कमल का फूल, झंडा और अष्टधातु का हाथी भी चोरी हो गया था।
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दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और फरार अन्य
पुलिस ने मामले में दो मुख्य आरोपियों मोहन उर्फ आशिक (18 वर्ष, परेठा, धार) और अर्जुन को गिरफ्तार किया है। वहीं, तीन अन्य आरोपी करण, सुनकेस और संतोष अभी फरार हैं। ये सभी धार जिले के निवासी हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
चोरी की गई मूर्तियों की जमीन में छुपाई गई बरामदगी
अरोपियों ने चोरी की गई मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए अर्जुन के घर के पास जमीन में गड्ढा खोदकर छिपा दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहन की निशानदेही पर वहां खुदाई कर तीनों मूर्तियों को बरामद किया। इस कार्रवाई से पता चलता है कि चोरों ने मूर्तियों को छुपाने के लिए सावधानी बरती थी।
चोरी का कारण और नकदी का बंटवारा
पूछताछ में सामने आया कि चोरों ने अष्टधातु की मूर्तियों को सोने-चांदी समझकर चोरी की थी। जब उन्हें असली धातु का पता चला, तो वे घबरा गए और मूर्तियों को जमीन में छिपा दिया। चोरी की गई दानपेटी से करीब 8,000 रुपये नकद मिले, जिसे आरोपियों ने आपस में बांट लिया।
पुलिस की विशेष जांच टीम की भूमिका
इंदौर ग्रामीण पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया। टीम का नेतृत्व सांवेर एसडीओपी देवेंद्र सिंह धुर्वे और क्षिप्रा थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह मुकाती कर रहे हैं। इस टीम ने त्वरित कार्रवाई कर चोरी का पर्दाफाश किया है।
चोरी की घटना से स्थानीय लोगों में चिंता
मांगलिया क्षेत्र के स्थानीय नागरिक इस घटना से चिंतित हैं। मंदिरों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। आम लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में और सुधार की आवश्यकता है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।



