लाल किले से पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया अपना एजेंडा, बांग्लादेश की सरकार से लेकर भ्रष्टाचारियों तक को सीधा संदेश

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नई दिल्ली। आज स्वतंत्रता दिवस पर 11 वीं बार लाल किले से झंडावंदन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में अपना एजेंडा भी स्पष्ट कर दिया। चाहे बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा की बात हो या महिला अपराध और भ्रष्टाचार का मामला हो पीएम ने सभी को साफ-साफ संदेश दे दिया है कि अब कोई समझौता नहीं होगा।

पीएम मोदी ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। मोदी ने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश की वृद्धि और विकास का समर्थक रहेगा। एक पड़ोसी देश के रूप में, मैं बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, उसके बारे में चिंता को समझ सकता हूं। मुझे उम्मीद है कि वहां हालात जल्द से जल्द सामान्य हो जाएंगे। 140 करोड़ देशवासियों की चिंता वहां के हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत हमेशा चाहता है कि हमारे पड़ोसी देश समृद्धि और शांति के रास्ते पर चलें। हम शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सेकुलर सिविल कोड की जरूरत बताई

पीएम ने अपने भाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की बात उठाई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमें बताया है और यह संविधान निर्माताओं का सपना था, इसलिए इसे पूरा करना हमारा कर्तव्य है। देश को धार्मिक आधार पर विभाजित करने वाले कानूनों को समाप्त किया जाना चाहिए। आधुनिक समाज में उनका कोई स्थान नहीं है। समय एक धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता (सेकुलर सिविल कोड) की मांग करता है और तब जाकर हम धार्मिक भेदभाव से मुक्त होंगे।

महिला अपराधों पर जताई चिन्ता

पीएम मोदी ने कहा कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के लिए दी जाने वाली सजाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है, ताकि परिणाम का डर रहे। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और हिंसा की घटनाओं पर चिंतित हैं। उन्होंने बिना नाम लिए पश्चिम बंगाल की घटना पर चिन्ता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ चिंताजनक घटनाक्रम भी हैं। मैं आज लाल किले से अपना दर्द व्यक्त करना चाहता हूं। एक समाज के रूप में, हमें गंभीरता से सोचने की जरूरत है। हमारी माताओं-बहनों पर अत्याचार को लेकर जनता में आक्रोश है। मैं इस आक्रोश को महसूस करता हूं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जल्द से जल्द जांच होनी चाहिए, राक्षसी कृत्यों में शामिल लोगों की जांच होनी चाहिए। समाज में विश्वास पैदा करने के लिए यह जरूरी है।”

पीएम ने भ्रष्टाचार को बताया दीमक

पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार पर काफी गंभीर चिन्ता जताई। उन्होंने संरक्षण की संस्कृति और भ्रष्टाचार को दीमक बताते हुए कहा कि कुछ लोग इसका महिमामंडन करते हैं। मोदी ने भ्रष्टाचार और इसके महिमामंडन पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि मुझे इस लड़ाई की कीमत चुकानी पड़ेगी, मेरी प्रतिष्ठा दांव पर लग सकती है, लेकिन व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से ज्यादा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित हैं।

एक देश-एक चुनाव के लिए सभी आएं आगे

पीएम मोदी ने कहा कि आज कोई भी योजनाओं को चुनाव के साथ जोड़ना आसान हो गया है। क्योंकि हर 3 महीने 6 महीने बाद चुनाव होते हैं। हर काम को चुनाव के रंग से रंग दिया गया है इसलिए देश ने व्यापक चर्चा की है। सभी राजनीतिक दलों ने अपने विचार रखे हैं। मैं लाल किले से तिरंगे को साक्षी रखते हुए देश के राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं। संविधान को समझने वाले लोगों से आग्रह करता हूं कि भारत की तरक्की के लिए, भारत के संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग जन सामान्य के लिए हो सके, इसके लिए वन नेशन वन इलेक्शन के लिए हमें आगे आना चाहिए।

इशारे-इशारे में विपक्ष पर निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रा दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग प्रगति नहीं देख सकते हैं,ऐसे लोग निराशा के गर्त में डूबे हुए हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे निराशावादी लोगों से सावधान रहने की अपील की। पीएम ने कहा कि ऐसे मुट्ठी भर निराशा के गर्त में डूबे हुए लोग, जब उनकी गोद में विकृति पलती है तो वह विनाश और सर्वनाश का कारण बन जाती है। ऐसे छुटपुट निराशावादी तत्वों को समझना चाहिए। पीएम ने कहा कि वे चाहते हैं कि देश के एक लाख ऐसे युवा जिनके परिवार का राजनीति से कोई नाता नहीं है, वे राजनीति में आए। उन्होंने कहा कि ये युवा किसी भी दल में जा सकते हैं. इससे देश का लोकतंत्र और मजबूत होगा।

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