मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता आशा के 8 माह के शावक की मौत की पुष्टि हुई है। वन विभाग की टीम ने 12 अक्टूबर 2026 को सुबह नियमित निगरानी के दौरान यह दुखद घटना दर्ज की।
कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता आशा के शावक की मौत कैसे हुई?
12 अक्टूबर की सुबह वन अधिकारियों ने आशा को चार शावकों के साथ देखा लेकिन पांचवां शावक नजर नहीं आया। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया और मृत शावक जंगल में मिला। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है।
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चीता प्रोजेक्ट के अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

मादा चीता आशा और उसके शावकों का महत्व
आशा नाम की मादा चीता नामीबिया से भारत लाई गई थी। 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में इसे छोड़ा था। यह भारत में चीता संरक्षण परियोजना की प्रमुख मादा है।
आशा के दो लिटरेचर हुए हैं, जिनमें कुल आठ शावक जन्मे। मृत शावक इस दूसरे लिटरेचर के पांच में से एक था।
कूनो में चीतों की वर्तमान स्थिति
इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 53 रह गई है। इनमें से 40 चीते भारत में जन्मे हैं। 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।
यह संख्या कूनो में चल रही संरक्षण परियोजना की सफलता और चुनौतियों दोनों को दर्शाती है।

भारत में चीतों की कुल संख्या और अन्य अभयारण्यों की स्थिति
देश भर में अब चीतों की कुल संख्या 59 है। गांधी सागर अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते मौजूद हैं।
यह आंकड़ा भारत में चीता संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रयासों का परिणाम है, लेकिन अभी भी इसे और मजबूत करने की जरूरत है।
शावक की मौत का संभावित प्रभाव और आगे की कार्रवाई
शावक की मौत से परियोजना को निश्चित रूप से झटका लगा है। वन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा करने का आश्वासन दिया है।
आगे वन विभाग और प्रोजेक्ट टीम इस घटना से सीख लेकर सुरक्षा और देखभाल के उपाय और सख्त कर सकते हैं।
मादा चीता आशा के शावकों की सुरक्षा पर ध्यान
आशा के शावकों की सुरक्षा और उनकी सही देखभाल इस परियोजना की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। वन अधिकारियों ने निगरानी बढ़ाने और शावकों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीव संरक्षण में लगातार सतर्कता और संसाधनों की आवश्यकता है।



