इंदौर। सोमवार को एक आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला। इसमें आंसू गैस के गोले और लाठी-डंडे जमकर चले। इसी तरह का एक आंदोलन आज इंदौर में भी चला। यहां किसानों पर आंसू गैस के गोले के साथ ही वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। खास बात यह कि इस आंदोलन की जानकारी कलेक्टर शिवम वर्मा को पहले से थी, फिर भी उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
इंदौर सांवेर तहसील में बरलई ग्राम में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब पश्चिम रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर ट्रैक्टर रैली निकाल रहे किसानों को पुलिस ने रोक दिया। सोमवार को करणी सेना के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर निकल गए, जिसका अंदाजा पुलिस-प्रशासन को नहीं था।
👉 यह भी पढ़ें:
- बिजली कंपनी इंजीनियर के यहां लोकायुक्त का छापा, आय से 258% ज्यादा प्रॉपर्टी, बेटे, बहू, दामाद के नाम करोड़ों की फैक्ट्री
- डायमंड गृह निर्माण संस्था की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस, बिल्डर विशाल खंडेलवाल से 8 घंटे पूछताछ
- महापौरजी, कम से कम अपने पड़ोसियों से तो ‘मित्रता’ निभा लेते, उनके विरोध के बाद भी खोद डाला सुदामा नगर
- वार्ड 60 की पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी का नामांकन और निर्वाचन शून्य, जानकारी छुपाने का लगा था आरोप, जिला कोर्ट का फैसला
- आखिर तुलसी पहलवान ने क्यों ली थी शिशुकुंज को बचाने की सुपारी, इंदौर से लेकर भोपाल तक के अफसरों को समझ नहीं आया
- कलेक्टर साहब प्राइवेट स्कूल तो अपना इंतजाम कर लेंगे, जरा आंगनबाड़ियों की तो हालत देखिए, जो आपके भरोसे बैठे हैं
किसानों ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप
पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसानों और करणी सेना के जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिसोदिया का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, जिसमें कई किसान घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए अपना विरोध जारी रखा।
पुलिस ने कहा-सिर्फ आंसू गैस वाटर कैनन का इस्तेमाल
वहीं, एडिश्नल एसपी ग्रामीण राज कृष्णा ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसानों को रोकना आवश्यक था। उन्होंने वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल की पुष्टि की, लेकिन लाठीचार्ज के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि पुलिस ने संयम के साथ कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
दो दिन पहले ही दे दी थी चेतावनी
किसानों ने दो दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस आंदोलन की चेतावनी दे दी थी। इसके बाद भी प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज जब काफी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर भोपाल रवाना होने लगे तो प्रशासन की नींद खुली और बलप्रयोग किया गया।
कलेक्टर ने नहीं दिखाई गंभीरता
इस मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा के रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब किसानों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी, तो उनके साथ बैठकर बात की जा सकती थी। उन्हें समझाया जा सकता है, लेकिन कलेक्टर ने ऐसी कोई पहल नहीं की और न ही आंदोलन की गंभीरता को समझा।
किसानों के साथ पहले ही लूट चुके हैं वाहवाही
सीएम डॉ.मोहन यादव ने किसानों के लिए चार गुना मुआवजे की घोषणा कर दी है, लेकिन यह पहले से अधिग्रहित भूमि पर लागू नहीं हो रहा। बताया जाता है कि कलेक्टर कुछ दिन पहले सीएम की घोषणा के बाद किसानों को बुलाकर वाहवाही लूट चुके हैं।



