चार महीने पहले मिल चुका था अवैध शराब नेटवर्क का सुराग, सागर में मौतों का होता रहा इंतजार!

Date:

AI Audio Companion Ready to stream
0:00
0:00 left


सागर। सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों के बाद सामने आया ललितपुर कनेक्शन अब प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस की जांच में सागर तक पहुंच रही नकली शराब के तार उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस अवैध शराब नेटवर्क का सुराग मई में ही पुलिस को मिल गया था और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी थी, उसी नेटवर्क की कड़ियां कुछ महीने बाद सागर में हुई मौतों से जोड़ी जा रही हैं।

सवाल यह है कि मई में जब पुलिस को अवैध शराब के इस नेटवर्क की जानकारी मिल गई थी, तब मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर निगरानी क्यों नहीं बढ़ाई गई? अगर ललितपुर से सागर के सीमावर्ती गांवों तक शराब पहुंच रही थी तो रास्ते में पुलिस और आबकारी विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी? और अगर नजर पड़ी थी तो कार्रवाई कहां हुई?

मई में एफआईआर, फिर भी नहीं टूटी सप्लाई चेन

ललितपुर पुलिस में मई 2026 में अवैध शराब की सप्लाई को लेकर एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी है। जांच के दौरान रवि लखेरा, उसकी पत्नी शिवानी लखेरा, चंद्रेश लोधी और मोना राजा सहित कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपियों पर नकली शराब तैयार करने और उसे दूसरे इलाकों में सप्लाई करने के आरोप हैं। शराब की बोतलों पर नकली रैपर और ढक्कन लगाकर उसे असली ब्रांड जैसा दिखाने की बात भी सामने आई है। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मई में नेटवर्क सामने आ गया था तो सितंबर तक इसकी सप्लाई चेन कैसे चलती रही? क्या दोनों राज्यों की पुलिस और आबकारी विभाग के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं हुआ? क्या ललितपुर में सामने आए नेटवर्क की जानकारी सागर पुलिस और आबकारी विभाग तक नहीं पहुंची? यदि पहुंची थी तो सीमावर्ती गांवों में निगरानी के लिए क्या कदम उठाए गए?

शराब माफिया के लिए कोई सीमा रेखा नहीं

ललितपुर से सागर के गांवों तक शराब पहुंचने की बात सामने आने के बाद सीमा निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा होता है। प्रारंभिक जांच में बांदरी, बढ़ोदिया, गूगरा खुर्द, नौराज और बैराज सहित कई गांवों तक सप्लाई पहुंचने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि शराब को कार और बाइक के जरिए सीमा पार पहुंचाया जाता था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कार-बाइक से लगातार शराब की खेप आती रही और जिम्मेदार विभागों को भनक तक नहीं लगी? यदि सामान्य पुलिस गश्त और आबकारी निगरानी इतनी कमजोर है कि नकली शराब की खेप एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचकर कई गांवों में बिक जाए, तो फिर सीमा क्षेत्रों में चल रही निगरानी व्यवस्था का औचित्य क्या है?

असली-नकली नहीं पहचान पाया सिस्टम

इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू नकली शराब की पैकिंग है। आरोप है कि शराब को असली ब्रांड जैसा दिखाने के लिए नकली रैपर और ढक्कन लगाए जाते थे। अवैध कारोबारियों ने बाजार की मांग, ब्रांड की पैकिंग और ग्राहकों की मनोवृत्ति को समझकर पूरा सिस्टम तैयार कर लिया, लेकिन सरकारी निगरानी तंत्र इस फर्जीवाड़े को पकड़ने में पीछे रह गया। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि शराब की दुकानों और उसके आसपास बिकने वाली बोतलों की नियमित जांच कितनी गंभीरता से होती है? क्या नमूने लिए जाते हैं? क्या बोतलों के बैच, पैकिंग और स्रोत की जांच होती है? या फिर आबकारी कार्रवाई सिर्फ अवैध शराब की छोटी-मोटी जब्ती तक सीमित है?

मौतों के बाद जागा सिस्टम

सागर में मौतों के बाद शराब दुकानों और अवैध शराब के ठिकानों की जांच तेज होने की बात सामने आ रही है। कार्रवाई और सीलिंग शुरू हो गई है। यह कार्रवाई अपने आप में एक और सवाल पैदा करती है—क्या प्रशासन को हर बार मौतों के बाद ही सक्रिय होना है? अवैध शराब बिकने की शिकायतों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं होती? जिन गांवों में लंबे समय से सस्ती शराब उपलब्ध थी, वहां पुलिस और आबकारी विभाग की नियमित निगरानी क्यों नहीं थी? स्थानीय स्तर पर शराब पहुंचाने और बेचने वालों की पहचान पहले क्यों नहीं की गई? अगर मौतों के बाद कुछ ही घंटों में संदिग्ध ठिकाने चिन्हित हो सकते हैं और कार्रवाई शुरू हो सकती है, तो यही काम पहले क्यों नहीं किया गया?

शराब माफिया के साथ निगरानी तंत्र भी जिम्मेदार

जहरीली शराब से मौतों के मामले में दोषियों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन जांच का दायरा केवल शराब बनाने और बेचने वालों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस इलाके में महीनों तक अवैध शराब बिकती रही, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। किस अधिकारी के क्षेत्र में शराब की सप्लाई हो रही थी? कितनी बार छापे पड़े? कितने नमूने लिए गए? कितनी अवैध शराब पकड़ी गई? मई की ललितपुर एफआईआर की सूचना सागर के अधिकारियों को कब मिली? सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई? सीमा से लगे इलाकों में कितनी चेकिंग हुई?

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

प्रतापगढ़ में कांग्रेस बैठक के दौरान टेंट संभालते समय करंट से 2 की मौत, 15 झुलसे

प्रतापगढ़ में कांग्रेस बैठक के दौरान टेंट संभालते समय करंट से 2 लोगों की मौत हुई और 15 झुलसे। तेज हवा से टेंट बिजली तारों को छू गया।

कोलकाता एयरपोर्ट पर CISF ने 1.14 करोड़ की विदेशी करेंसी जब्त की

कोलकाता एयरपोर्ट पर CISF ने 1.14 करोड़ की विदेशी करेंसी जब्त की खबर की पुष्टि नहीं हुई। बेंगलुरु और मुंबई में ऐसे मामले दर्ज हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव-दास से पूछा, ‘परमिशन नहीं थी तो जंतर-मंतर क्यों गए?’

दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछा कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, तो वे वहां क्यों गए। अदालत ने याचिका वापस लेने को मंजूरी दी।

उन्नाव में बक्सा कांड: पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की सिलबट्टे से कर दी हत्या

उन्नाव में बक्सा कांड में पत्नी और प्रेमी ने पति की सिलबट्टे से हत्या की। शव को बक्से में बंद कर हाईवे पर फेंका गया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।

अहिरवार के ट्रांसफर पर टिप्पणी कर फंसे भाजपा विधायक अजय विश्नोई, जमकर हुए ट्रोल

मध्य प्रदेश में IAS राम प्रकाश अहिरवार का तबादला भोपाल नगर निगम आयुक्त पद पर हुआ। भाजपा विधायक अजय विश्नोई की टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ा।

राम गोपाल वर्मा की क्राइम थ्रिलर ‘पुलिस कंपनी’ की रिलीज डेट घोषित

राम गोपाल वर्मा की क्राइम थ्रिलर पुलिस कंपनी की रिलीज डेट का ऐलान। फिल्म 4 जून 2027 को सिनेमाघरों में आएगी। हर्षवर्धन राणे मुख्य भूमिका में।

CM मोहन यादव ने स्कूल विस्तार का ऐलान, 20000 नई भर्तियों का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश में स्कूल विस्तार और शिक्षकों की भर्ती के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 20000 नई भर्तियों की योजना घोषित की है। इसका उद्देश्य शिक्षा गुणवत्ता सुधारना है।

SBI के 3,897 ग्राहकों के डेटा लीक, नाम-मोबाइल-पता डार्क वेब पर हुआ एक्सपोज़

SBI के 3,897 ग्राहकों का डेटा लीक हुआ है। नाम, मोबाइल नंबर और पता डार्क वेब पर एक्सपोज़ हुआ। बैंक ने जांच और सुरक्षा बढ़ाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अदालतें चुनावों में न्याय के लिए चुप नहीं रह सकतीं

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में न्याय के लिए अदालतें चुप नहीं रह सकतीं कहा। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सुरक्षा और नामांकन समय सीमा बढ़ाई गई।

सीएम मोहन यादव ने भोपाल में पुलिस स्मृति दिवस परेड में शहीदों को किया नमन

भोपाल में पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहीदों को नमन किया। उन्होंने शहीद परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी घोषित की।