इंदौर-हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण के बाद इंदौर और हैदराबाद के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। यह कॉरिडोर मौजूदा 16 से 18 घंटे के सफर को घटाकर केवल 8 से 10 घंटे कर देगा।
इंदौर-हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का महत्व
इंदौर-हैदराबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से तीन राज्यों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना को सीधे जोड़ा जाएगा। यह 4-लेन सेमी-एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर इन राज्यों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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इसके अलावा, यह कॉरिडोर इंदौर, बड़वाह, खंडवा, बुरहानपुर, अकोला, नांदेड़ और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना की विशेषताएं और लागत
यह परियोजना मुख्य रूप से ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड ढांचे पर आधारित है। खंडवा से अकोला तक का हिस्सा पूरी तरह ग्रीनफील्ड के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹10,000 से ₹15,000 करोड़ के बीच है। तेलंगाना का 96 किमी लंबा हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है, जिससे परियोजना की सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
सुरंगों के निर्माण का काम
मध्य प्रदेश के दुर्गम घाट क्षेत्र में तीन प्रमुख सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। ये सुरंगें भैरुघाट और चोरल घाट को बाईपास करेंगी, जिससे यात्रा और भी सुगम हो जाएगी।
गौरतलब है कि इन सुरंगों की कुल लंबाई लगभग 1.8 किमी है, जो क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही हैं।

आम आदमी पर असर
इस कॉरिडोर के बनने से आम आदमी को यात्रा में सुविधा होगी और समय की बचत होगी। इसके अलावा, यह व्यापारिक गतिविधियों को भी तेज करेगा जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
दरअसल, इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे, जो क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।
आगे की राह
परियोजना का इंदौर-इच्छापुर सेक्शन 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है ताकि निर्धारित समय सीमा में परियोजना को पूरा किया जा सके।
इस बीच, परियोजना की सफलता से अन्य राज्यों के बीच भी इस प्रकार की कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।



