इतने बड़े पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में एक टीआई की इतनी हिम्मत कैसे?

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मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार चिन्ता जाहिर कर चुके हैं। पुलिस अफसरों पर कार्रवाई कर चुके हैं। लगातार चेतावनी देते रहते हैं, लेकिन इसका असर पुलिस विभाग पर होता नहीं दिख रहा।

ताजा उदाहरण चंदन नगर टीआई इंद्रमणि पटेल का है। उनकी करतूतों से सुप्रीम कोर्ट तक दंग है। सुप्रीम कोर्ट यह सुनकर हैरान रह गई कि टीआई साहब ने 165 केसों में दो लोगों को ही गवाह बनाया है। जरा सोचिए न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह को कितना गुस्सा आया होगा। तभी तो उन्होंने कहा कि तुम दुर्भाग्य से उस कुर्सी पर बैठे हो, तुम्हें वहां नहीं होना चाहिए। यह हमारी आत्मा की पीड़ा है।

पटेल साहब का ही दूसरा मामला इंदौर हाईकोर्ट में सामने आया। जब टीआई साहब ने बगैर अपराध एक इंजीनियर को 30 घंटे तक थाने में हथकड़ी लगाकर बैठाए रखा। इस मामले में कोर्ट ने माना कि पटेल का कृत्य एक नागरिक के जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को मामले में जिम्मेदार टीआई और पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

जब इंदौर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू हुई तो लोगों को पुलिस से उम्मीद बंध गई थी। ढेर सारे अफसरों की तैनाती भी हुई। तब लोगों को लगा कि अब थाने स्तर पर चल रही गड़बड़ियां कम हो जाएंगी और टीआई की मनमानियों पर रोक लगेगा।

लेकिन, यह क्या? अफसरों की फौज के रहते हुए भी टीआई पहले से भी ज्यादा मनमानी पर उतर आए। इसका ताजा उदाहरण टीआई इंद्रमणि पटेल हैं। पटेल साहब ने क्या नहीं किया? हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को समझ नहीं आ रहा कि मध्यप्रदेश पुलिस में यह चल क्या रहा है।

सीएम साहब, आप जनता के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में किसी टीआई की इतनी हिम्मत कैसे पड़ जाती है कि वह एक थाने में अपना कानून चलाने लगे। इनके ऊपर के सारे अफसर क्या आंख-कान बंद कर बैठे थे?

जब सीएम के प्रभार वाले जिले में खाकी का यह हाल है तो मध्यप्रदेश के अन्य जिलों का भगवान ही मालिक है।

सीएम साहब, अब समय आ गया है खाकी पर लगे दाग धोने का…इसमें ज्यादा देर कर दी तो पूरा सिस्टम ही बदरंग हो जाएगा।

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