क्या एमपी के नए सीएस की नियुक्ति में चली दिल्ली की मर्जी, आखिर अंत समय में राजौरा कैसे हो गए रेस से बाहर-हरीश फतेहचंदानी

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव के पद पर अब वरिष्ठ आईएएस अनुराग जैन की नियुक्ति हो चुकी है। हालांकि इनके नाम की चर्चा पहले से भी थी, लेकिन सोमवार सुबह से ही मीडिया में डॉ.राजेश राजौरा का नाम चल रहा था। बताया तो यहां तक जाता है कि डॉ.राजौरा को लोगों ने आज सुबह बधाई भी दी। अचानक सीएम डॉ.मोहन यादव के झारखंड रवाना होते ही जैन का नाम फाइनल कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दिल्ली से आए संदेश के बाद नए सीएस की घोषणा की गई।

सूत्र बताते हैं कि अंतिम समय में यह खेल बदला है। हालांकि कुछ महीने पहले दिल्ली के मध्यप्रदेश भवन में सीएम यादव के साथ जैन की मुलाकातों के बाद इनके नाम के कयास लगने शुरू हो गए थे। उस समय भी रेस में डॉ.राजेश राजौरा शामिल थे। अब जबकि आज यानी 30 सितंबर को वर्तमान मुख्य सचिव वीरा राणा का एक्सटेंशन समाप्त हो रहा था, राजौरा का नाम सबसे ऊपर चलने लगा। भोपाल मंत्रालय के सूत्रों ने भी राजौरा के नाम पर सहमति जताई थी और यही वजह है कि मीडिया में भी उनके नाम की खबर चलने लगी। फैसला राजौरा या जैन के नाम पर ही होना था। सूत्र बताते हैं कि इन दिनों भाजपा शासित राज्यों में पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की प्रशासनिक नियुक्तियों मे भी रुचि है, इस कारण यह माना जा रहा था कि अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगेगी। और अंत में जो कुछ हुआ उससे स्पष्ट है कि फैसला दिल्ली की मर्जी से ही हुआ।

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मोदी सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका

अनुराग जैन का नाम केंद्र सरकार के तेजतर्रार सचिवों में शामिल है। जैन ने दस साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त सचिव भी थे। उस समय वे कई विभागों के बीच समन्वय का काम देखते थे। वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री जन-धन योजना तैयार की। इसके अलावा मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के सचिव रहते हुए उन्होंने पब्लिक सर्विस डिलीवरी गारंटी एक्ट लागू किया था। पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में जैन को रोड, ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भोपाल कलेक्टर भी रह चुके हैं जैन

जैन भोपाल, मंडला और मंदसौर में कलेक्टर रह चुके हैं। जब शिवराज सिंह चौहान सीएम थे, तब जैन दो बार उनके सचिव रह चुके हैं। 2018 में शिवराज सरकार में वे वित्त विभाग संभाल रहे थे। जब कमलाथ की सरकार आई तो भी उन्होंने वित्त विभाग संभाला। अप्रैल 2020 में वे फिर दिल्ली लौट गए।

बीटेक करने के बाद बने आईएएस

जैन ने 1986 में आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक ऑनर्स किया है। 1989 में वे आईएएस बने, इसके बाद उन्होंने अमेरिका के मैक्सवेल स्कूल से लोक प्रशासन में एमए किया था। जैन को कई बड़े अवार्ड भी मिल चुके हैं। ई-गवर्नेंस के लिए उन्हें केंद्र सरकार द्वारा वेब रत्न पुरस्कार दिया गया था। इसके साथ ही वे टेनिस के अच्छे खिलाड़ी भी हैं। टेनिस में उन्हें 11 राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। इतना ही नहीं वे क्रिकेट के भी अच्छे खिलाड़ी हैं।

प्रदेश को ऐसे अधिकारी की थी जरूरत

वर्तमान में मध्यप्रदेश जिस तेजी से विकास कर रहा है उसकी गति और बढ़ाने के लिए जैन से प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत थी। पीएम मोदी और सीएम यादव दोनों का पसंद होने के कारण उन्हें केंद्र व राज्य से समन्वय बनाने में भी काफी आसानी होगी। निश्चित तौर पर उनके आने से प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा भी मजबूत होगा और विकास को भी पंख लगेंगे।

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