कैमोर में एस्बेस्टस कचरे की समस्या एक बार फिर गंभीर हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कैमोर में फैले एस्बेस्टस कचरे और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का व्यापक फैलाव
कटनी जिले के कैमोर–कलहरा इलाके में एस्बेस्टस कचरा विभिन्न आवासीय क्षेत्र, खेल मैदान और खुले स्थानों में फैला हुआ है। अनुमानित तौर पर यहां करीब 10 लाख टन एस्बेस्टस-दूषित मलबा मौजूद है। यह कचरा 1934 में स्थापित भारत की पहली एस्बेस्टस फैक्ट्री से संबंधित है, जिसे ब्रिटिश काल में टर्नर एंड न्यूऑल कंपनी ने चलाया था।
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इस जहरीले फाइबर मलबे के कारण इलाके में रहने वाले हजारों लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

एस्बेस्टस कचरे से प्रभावित लोगों की संख्या और बीमारियां
स्थानीय रिपोर्टों और उमंग सिंघार के अनुसार, आधिकारिक तौर पर 1,300 से 1,500 लोग एस्बेस्टस से जुड़ी बीमारियों जैसे कैंसर, असबेस्टोसिस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। वहीं, सिंघार ने प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या 10,000 से 15,000 तक होने की आशंका जताई है।
यह स्थिति इलाके के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बनी हुई है।
उमंग सिंघार की राज्य सरकार से मांगें
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से मांग की है कि पूरे कैमोर क्षेत्र में एक स्वतंत्र प्रदूषण सर्वेक्षण कराया जाए। इसके अलावा, प्रभावित लोगों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए। साथ ही, एस्बेस्टस कचरे को तुरंत सुरक्षित तरीके से हटाने की भी आवश्यकता है।
सिंघार ने सरकार की 2016 की रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई न करने पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासकीय पहल और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका
मीडिया कवरेज और सिंघार के दबाव के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है।
इसके अलावा, राजस्व विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद की संयुक्त टीम कैमोर के खेल मैदान, मिट्टी और भूजल के नमूने लेकर भोपाल की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज चुकी है।
कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ
एस्बेस्टस फैक्ट्री से निकला यह कचरा दशकों से कैमोर के निवासियों के लिए खतरा बना हुआ है। पूर्व श्रमिकों और उनके परिवारों ने पर्याप्त सुरक्षा और सूचना न मिलने की शिकायत की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैमोर में इस जहरीले कचरे के संपर्क में आने से सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। साथ ही, इलाज के खर्चे भी प्रभावित परिवारों के लिए भारी पड़ रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है कैमोर में एस्बेस्टस कचरे का भविष्य?
इस मुद्दे पर सरकार की सख्त कार्रवाई और स्वतंत्र सर्वेक्षण से ही कैमोर के लोगों को राहत मिल सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण और कचरे के सुरक्षित निस्तारण के बिना स्थिति और बिगड़ सकती है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद उम्मीद है कि जल्द ही इस पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का समाधान निकलेगा।



