Ready to play
👉 यह भी पढ़ें:
- Karachi Terror Attack: पाकिस्तान ने भारत पर लगाया बड़ा आरोप, भारत का करारा जवाब- ‘पहले अपने आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई करें’
- Pakistan Breaking News: कराची में रेंजर्स मुख्यालय के पास धमाका और ताबड़तोड़ फायरिंग, 6 आतंकवादी ढेर हो गए तो वहीं, चार जवान मारे गए
- मध्य पूर्व में फिर भड़की जंग: ईरान का बड़ा हमला, इजराइल और अमेरिकी ठिकाने बने निशाना
- ईरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ा हमला, जलते विमान और उठता धुआं
- पहलगाम आतंकी हमले की जांच चीन तक पहुंची, एनआईए ने मांगी मदद
- पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एनआईए ने दाखिल की चार्जशीट, लश्कर के टॉप कमांडर साजिद जट्ट ने रची थी साजिश
पहलगाम आतंकी हमले में नया खुलासा: पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा दिसंबर 2024 से ही कश्मीर में किसी बड़े हमले की फिराक में था
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हमले में जिन तीन संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी किए गए थे, उनमें से एक की पहचान पाकिस्तानी आतंकी हाशिम मूसा के रूप में हुई है। खुफिया एजेंसियों को मिली सीक्रेट जानकारी के मुताबिक, मूसा लंबे समय से गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।

सूत्रों के अनुसार, हाशिम मूसा दिसंबर 2024 से ही कश्मीर में किसी बड़े हमले की फिराक में था। मूसा का सीधा संबंध पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूसा कभी पाकिस्तानी सेना का पैरा-कमांडो था जिसे भारत पर हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा में शामिल किया गया था।
हाशिम मूसा का नाम पहले भी कश्मीर में हुए कई आतंकी हमलों में सामने आ चुका है। अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गगनगिर में हुए हमले में छह गैर-स्थानीय लोग और एक डॉक्टर मारे गए थे, जबकि बारामूला के बूटा पथरी में दो भारतीय सैनिकों और दो पोर्टरों की जान गई थी। दोनों घटनाओं में मूसा की सक्रिय भूमिका रही थी।
इन हमलों में पाकिस्तान में प्रशिक्षित स्थानीय आतंकियों – जुनैद अहमद और अरबाज मीर – की संलिप्तता भी सामने आई थी, जिन्हें नवंबर और दिसंबर 2024 में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ों में मार गिराया था। इसके बाद मूसा घाटी में एक और बड़े हमले की साजिश में जुट गया था।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों को यह अहम जानकारी पहलगाम हमले के बाद पकड़े गए स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) से पूछताछ के दौरान मिली है। इन OGWs ने न केवल आतंकियों की रसद और ठिकानों की व्यवस्था की थी, बल्कि रेकी में भी मदद की थी।
यह खुलासा एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद को पनाह देने वाली नीति और उसकी सेना की भारत-विरोधी साजिशों को बेनकाब करता है। ISI की भूमिका सिर्फ पहलगाम हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई आतंकी घटनाओं में भी इसकी गहरी संलिप्तता पाई गई है।



