पहलगाम आतंकी हमले की जांच चीन तक पहुंची, एनआईए ने मांगी मदद
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में पहली बार चीन से सहयोग मांगा है। जांच के दौरान बरामद हुआ गोप्रो हीरो‑12 ब्लैक कैमरा सबसे पहले चीन में सक्रिय किया गया था, जिसके बाद एजेंसी इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए वहां तक पहुंची है।
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एनआईए यह पता लगाना चाहती है कि इस कैमरे को सबसे पहले किसने और कहां इस्तेमाल किया और यह कैमरा हमले में शामिल आतंकियों तक कैसे पहुंचा। जांच में सामने आया है कि इस कैमरे का इस्तेमाल हमले से पहले पहलगाम और आसपास के इलाकों की रेकी करने के लिए किया गया था।
इस मामले में जम्मू स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने चीन के सक्षम न्यायिक प्राधिकरण को अनुरोध पत्र (लेटर रोगेटरी) भेजने की अनुमति दे दी है।
आदेश के अनुसार, जांच टीम ने अदालत में आवेदन देकर भारत के विदेश मंत्रालय के माध्यम से चीन से मदद मांगने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच पारस्परिक कानूनी सहायता समझौता मौजूद है, इसलिए यह अनुरोध अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जाएगा।
एजेंसी का मानना है कि इस कैमरे की खरीद से लेकर अंतिम उपयोग तक की जानकारी मिलने से यह पता लगाया जा सकेगा कि हमलावरों ने हमले से पहले इलाके की रेकी कब और कैसे की।
एनआईए ने कैमरा बनाने वाली अमेरिकी कंपनी गोप्रो को भी कानूनी नोटिस भेजकर इसकी सप्लाई चेन और तकनीकी जानकारी मांगी थी। कंपनी ने जवाब में बताया कि यह कैमरा चीन में स्थित वितरक एई ग्रुप इंटरनेशनल को सप्लाई किया गया था और इसे पहली बार 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन शहर में सक्रिय किया गया था।
हालांकि इसके बाद यह कैमरा किसके पास गया और कैसे आतंकियों तक पहुंचा, इसकी जानकारी कंपनी के पास नहीं है। इसी वजह से इस मामले में चीन के अधिकारियों से तकनीकी रिकॉर्ड और खरीदार की जानकारी जुटाने के लिए सहयोग मांगा गया है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी आतंकियों ने बैसरन (पहलगाम) में हमला कर 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर 26 अप्रैल 2025 को एनआईए ने इस मामले की आधिकारिक जांच अपने हाथ में ली थी।



