ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत को ईरान का समर्थन मिला है, जिसमें ईरान ने भारत को ‘महत्वपूर्ण एवं पुराना दोस्त’ करार दिया है। यह बयान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई द्वारा दिया गया। उन्होंने भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को भी रेखांकित किया।
ब्रिक्स सम्मेलन के पहले भारत-ईरान संबंधों पर चर्चा
ईरान और भारत के बीच ब्रिक्स सम्मेलन से पहले संबंधों की गर्माहट स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं।
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इसके पहले, 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी।
व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग में संभावनाएं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रिक्स मंच भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसके अलावा, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया गया।
चाबहार पोर्ट परियोजना को ईरान ने भारत के साथ रणनीतिक संबंधों में शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है। यह परियोजना दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय संपर्क में वृद्धि का माध्यम बनेगी।
कूटनीतिक महत्व और भारत की भूमिका
ईरान ने भारत को एक ‘महत्वपूर्ण राजनयिक केंद्र’ बताया है। एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों में नई दिल्ली की प्रभावशाली भूमिका की सराहना की गई है। भारत का रुख पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने का है, जिसमें कूटनीति और संवाद पर जोर दिया गया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता को दोहराया है।
आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव
भारत और ईरान के बढ़ते सहयोग से आम जनता को कई लाभ हो सकते हैं। व्यापारिक संबंध बढ़ने से रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है।
इसके अलावा, चाबहार पोर्ट के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले समय में भारत और ईरान के बीच संबंध और भी प्रगाढ़ हो सकते हैं। ब्रिक्स मंच पर द्विपक्षीय वार्ताओं से व्यापारिक और रणनीतिक पहलुओं को नया आयाम मिल सकता है।
इस तरह के सहयोग से दोनों देशों के वैश्विक मंचों पर प्रभाव को भी बढ़ावा मिलेगा। ईरान का समर्थन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है।



