मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम से राष्ट्रपति को भेजे गए कथित इस्तीफा पत्र को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है। इस फर्जी पत्र ने सोशल मीडिया पर तेजी से ध्यान आकर्षित किया, लेकिन आयोग ने 27 सितंबर 2026 को इसे खारिज कर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम से फर्जी इस्तीफा पत्र वायरल
सोशल मीडिया पर एक ऐसा दस्तावेज़ तेजी से फैलाया गया जिसमें दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह पत्र भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित था और इसमें ज्ञानेश कुमार के कथित हस्ताक्षर थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस पत्र को पूरी तरह से नकली बताया।
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चुनाव आयोग ने किया फर्जी इस्तीफा पत्र का खंडन
27 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह वायरल पत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित हो सकता है और इसके माध्यम से भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया है। आयोग ने सभी संबंधित लोगों से सचेत रहने की अपील की है।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर विवादों की पृष्ठभूमि
इस फर्जी इस्तीफा पत्र का वायरल होना ऐसे समय में हुआ जब मतदाता सूची में संशोधन और हटाने की प्रक्रिया, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कहा जाता है, विवादों में थी। विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी इस प्रक्रिया को लेकर लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
चुनाव आयोग और आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरों को भी बढ़ावा दिया। खासकर एस. एस. संधू, विवेक जोशी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच कथित मतभेदों को लेकर आरोप लगाए गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि SIR से जुड़े आदेश तीनों आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए हैं।
फर्जी इस्तीफा पत्र के वायरल होने से आम जनता पर असर
इस तरह के फर्जी दस्तावेज आम जनता के बीच भ्रम फैलाते हैं। लोगों को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर संदेह हो सकता है। इसलिए चुनाव आयोग का खंडन और स्पष्टता देना आवश्यक था ताकि मतदाताओं का विश्वास बना रहे।
आगे चुनाव आयोग की संभावित कार्रवाई
चुनाव आयोग इस तरह के फर्जी दस्तावेजों पर निगरानी बढ़ा सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कदम उठाने की भी संभावना रहती है। आयोग की निगरानी से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।



