Doctors Safety in India: डोंबिवली में डॉक्टर्स  पर हमले के बाद IMA ने जारी किया 100 हिंसक घटनाओं का डिजिटल ग्रिड, WHO के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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मुंबई: महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टर्स  के साथ हुई कथित मारपीट के बाद चिकित्सा जगत में आक्रोश बढ़ गया है। डॉक्टर्स की सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने देशभर में डॉक्टर्स पर हुए हमलों का एक डिजिटल ग्रिड जारी किया है।

इस डिजिटल ग्रिड में हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए करीब 100 हिंसक हमलों का विवरण दर्ज किया गया है। आईएमए का कहना है कि डॉक्टर्स की सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बन रही हैं।

WHO के आंकड़े: 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी झेलते हैं शारीरिक हिंसा

डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा केवल भारत की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चिंता बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोधों के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 40 फीसदी स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर के दौरान किसी न किसी रूप में शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं।

अगर मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी और गाली-गलौज जैसी घटनाओं को भी शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 60 फीसदी से अधिक तक पहुंच जाता है।

भारत में भी डॉक्टर्स  पर हमले के मामले गंभीर

स्पेन के मेडिकल जर्नल Atención Primaria में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा के मामले कई देशों में बड़ी समस्या बने हुए हैं। रिपोर्ट में जर्मनी में 91 फीसदी, चीन में 90 फीसदी, पेरू में 84.5 फीसदी, तुर्किए में 84 फीसदी और भारत में 77.3 फीसदी तक हिंसा के मामलों का उल्लेख किया गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंबई से लेकर सिंगापुर तक डॉक्टर्स  पर हमलों के पीछे कई कारण एक जैसे हैं। इनमें अस्पतालों में अत्यधिक भीड़, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, इलाज के लिए लंबा इंतजार और मरीजों के परिजनों में बढ़ती बेचैनी प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा डॉक्टर्स और मरीजों के परिवार के बीच संवाद की कमी भी कई बार तनाव को बढ़ा देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ लोगों में यह धारणा भी हिंसा को बढ़ावा देती है कि इलाज पर पैसा खर्च करने के बाद मरीज का पूरी तरह ठीक होना निश्चित है।

कड़े कानूनों के बावजूद नहीं थम रही हिंसा

भारत के 19 राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू हैं। इसके बावजूद डॉक्टर्स पर हमले पूरी तरह नहीं रुके हैं।

महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि 2010 से 2021 के बीच डॉक्टर्स पर हमले के 738 मामले दर्ज किए गए, लेकिन इनमें से केवल 4 मामलों में सजा हो सकी।

दूसरे देशों ने कैसे कम की डॉक्टर्स के खिलाफ हिंसा?

दुनिया के कुछ देशों ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

स्पेन में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को राज्य के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा गया, जिसके बाद ऐसे मामलों में करीब 50 फीसदी की कमी आने का दावा किया गया।

वहीं सिंगापुर में डॉक्टरों या स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना, एक साल तक की जेल या दोनों का प्रावधान है।

भारत में भी डॉक्टर्स की सुरक्षा को लेकर एक प्रभावी और समान केंद्रीय कानून की मांग लंबे समय से उठती रही है। डोंबिवली की घटना के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि आखिर अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित माहौल कब मिलेगा।

अब सवाल आपसे…

क्या भारत में डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ एक सख्त केंद्रीय कानून बनाया जाना चाहिए? क्या मौजूदा कानूनों का सही तरीके से लागू न होना हिंसा बढ़ने की बड़ी वजह है?

आपके अनुसार अस्पतालों में डॉक्टर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, अस्पताल प्रशासन और समाज को क्या कदम उठाने चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
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Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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