Parliament March News: प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से सरकार और देश के राजनीतिक दलों को एक अहम संदेश दिया है। वांगचुक ने बताया है कि किन परिस्थितियों में वह आज यानी 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अपनी शर्तें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों और पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, तो वह अपना अनशन खत्म कर देंगे।
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सोनम वांगचुक ने रखीं अनशन खत्म करने की शर्तें
सोनम वांगचुक के मुताबिक, वह 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं, अगर इनमें से कोई एक शर्त पूरी होती है।
पहली शर्त: सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया नाकामियों, पेपर लीक और इससे जुड़े अन्य मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
दूसरी शर्त: सोनम वांगचुक और CJP नेतृत्व को संसद तक पहुंचने दिया जाए, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे।
वांगचुक ने यह भी कहा कि अगर उनकी सेहत या किसी अन्य कारण से उन्हें संसद तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिलती है, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें यही भरोसा दिलाएं।
उन्होंने अस्पताल में अपनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें “गैर-कानूनी नजरबंदी” में रखा गया है, जहां उनके आने-जाने, बोलने और बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगी हुई है।
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं सोनम वांगचुक
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक इस समय स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि, वांगचुक और उनकी पत्नी ने अस्पताल में उनकी स्थिति को नजरबंदी बताया है।
वहीं, सरकार का पक्ष है कि पुलिस ने अदालत के निर्देश के बाद आंदोलन कर रहे वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया था। इस पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है।
संसद मार्च को लेकर दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा
आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और आंदोलनकारियों की ओर से संसद मार्च का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी है।
सोनम वांगचुक की पत्नी ने भी एक दिन पहले इस मार्च का नेतृत्व करने का संदेश दिया था। ऐसे में नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
शिक्षा व्यवस्था और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत और प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बाद जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और बैरिकेडिंग की गई है।
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या प्रदर्शनकारी संसद मार्च निकालने की कोशिश करेंगे और क्या सरकार या राजनीतिक दल सोनम वांगचुक की शर्तों पर कोई पहल करेंगे?
आपकी राय क्या है?
क्या आपको लगता है कि सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगें संसद तक पहुंचाने का अवसर मिलना चाहिए? या संसद सत्र के दौरान प्रस्तावित मार्च को रोकना कानून-व्यवस्था के लिहाज से सही फैसला है?
आप इस पूरे विवाद को कैसे देखते हैं? क्या सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



