NEET पेपर लीक पर घिरी सरकार! राहुल गांधी के धरने के बाद बदली रणनीति, सोनम वांगचुक से मुलाकात और संसद में चर्चा पर बनी सहमति

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नीट पेपर लीक मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एंट्री  के बाद सरकार की सक्रियता अचानक बढ़ गई।

सरकार को न सिर्फ लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से बातचीत के लिए आगे आना पड़ा, बल्कि आंदोलन के दौरान घायल युवाओं से मुलाकात के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी जाना पड़ा। इतना ही नहीं, बुधवार को सरकार ने पहली बार संसद में इस मुद्दे पर विपक्ष की मांग के अनुरूप चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि, विपक्ष ने अब चर्चा के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को शर्त के तौर पर सामने रखा है।

आंदोलन को हल्के में आंकना सरकार को पड़ा भारी?

दरअसल, बीते महीने जंतर-मंतर पर शुरू हुए आंदोलन में शुरुआती दौर में सीमित संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखकर सरकार निश्चिंत नजर आ रही थी। सरकार के रणनीतिकार शायद यह अनुमान नहीं लगा पाए कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है।

सोमवार को संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया रूप लिया। इसके बाद राहुल गांधी के धरने ने पूरे मामले को और अधिक राजनीतिक धार दे दी। बदली हुई परिस्थितियों में सरकार को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ा।

भूख हड़ताल के 24वें दिन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को सोनम वांगचुक से मुलाकात के लिए आगे आना पड़ा। सरकार की ओर से उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की गई।

राहुल गांधी के धरने के बाद बदला सियासी माहौल

माना जा रहा है कि आंदोलन में राहुल गांधी की सक्रिय भागीदारी के बाद सरकार की चिंता बढ़ी। प्रधानमंत्री आवास के पास उनके धरने ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया।

सरकार के रणनीतिकारों को आशंका हुई कि अब तक अपेक्षाकृत गैर-राजनीतिक नजर आ रहा यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है। यही वजह रही कि लंबे समय तक सोनम वांगचुक से दूरी बनाए रखने के बाद सरकार उनके पास पहुंची और उनसे अनशन खत्म करने की अपील की।

इसके तुरंत बाद संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्ष की मांग को स्वीकार करना भी सरकार के बदले हुए रुख के तौर पर देखा गया।

पेपर लीक से नाराज है देश का युवा?

पूरे मामले को केवल NEET पेपर लीक तक सीमित करके देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की खबरों ने युवाओं के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है।

NEET, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदें और भविष्य का सपना जुड़ा होता है। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की खबरें युवाओं के भरोसे को सीधे प्रभावित करती हैं।

यही वजह है कि इस मुद्दे पर सरकार की रणनीति और विपक्ष की राजनीति के बीच असली सवाल युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का है।

सोनम वांगचुक ने कहा—”मैं जीना चाहता हूं और अपने छात्रों के पास लौटना चाहता हूं”

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र में बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की सेवा के लिए उनके पास अभी बहुत काम बाकी है। वांगचुक ने लिखा कि वह जीना चाहते हैं और अपने छात्रों, शिक्षा तथा उस काम में वापस लौटना चाहते हैं, जिसने उनके जीवन को परिभाषित किया है।

उनके इस बयान के बाद अब आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार की नई रणनीति युवाओं के गुस्से को शांत कर पाएगी या फिर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता का मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन सकता है?

अब सवाल आपसे…

क्या आपको लगता है कि NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं पर सरकार को संसद में व्यापक चर्चा के साथ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए?

क्या शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस समस्या का समाधान है, या परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ज्यादा जरूरी है?

अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
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Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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