दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 500 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और प्रमुख नेताओं की हिरासत
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर, जनपथ और संसद मार्ग की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कुल 500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हैं। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, आप नेता सौरभ भारद्वाज, योगेंद्र यादव, यूट्यूबर ध्रुव राठी और काव्या कर्नाटका को भी हिरासत में लिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। इसलिए दिल्ली में 40,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जिनमें दिल्ली पुलिस के 15,000 और अर्धसैनिक बलों के 25,000-26,000 जवान शामिल थे। साथ ही BNS की धारा 163 लागू की गई और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहीं। कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश एवं निकास द्वार बंद कर दिए गए थे।
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिसकर्मियों की चोटें
प्रदर्शन के दौरान पथराव और झड़पें हुईं, जिनमें दिल्ली पुलिस और CISF के जवान घायल हुए। कुछ पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ी गई और मारपीट भी हुई। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे थे, जिस कारण यह कार्रवाई आवश्यक हुई।
कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस पर हमले, दंगा फैलाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में 25 से अधिक FIR दर्ज की हैं। ये मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए गए हैं। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं भी बड़े पैमाने पर उपद्रव की सूचना नहीं मिली है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विवाद और प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
इस प्रदर्शन की पृष्ठभूमि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोप हैं। सीजेपी, AISA, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समर्थक छात्रों तथा कार्यकर्ताओं ने मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताया। वे फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची में हेरफेर के खिलाफ गहन जांच की मांग कर रहे हैं।
आगे की संभावनाएं और आम जनता पर असर
इस प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद दिल्ली में कानून व्यवस्था और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। आम आदमी को ट्रैफिक बाधाएं, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट और सुरक्षा कड़ी होने के कारण असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी रहेंगी। भविष्य में इस मुद्दे पर और भी आंदोलन या सरकारी जवाबदेही की संभावना बनी हुई है।



