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नई दिल्ली। बिहार में वोटर लिस्ट की जांच और सुधार का अभियान चल रहा है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अब मामले पर सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अब तक 5 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं. ये याचिकाएं एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर), सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आरजेडी सांसद मनोज झा और बिहार के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के आदेश को मनमाना और निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करने वाला बताया है। सोमवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल समेत कुछ अन्य वकील याचिकाकर्ताओं की तरफ से जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस जोयमाल्या बागची की अवकाशकालीन बेंच के सामने पेश हुए। उन्होंने कहा कि बिहार के 8 करोड़ मतदाताओं की जांच इतने कम समय मे संभव नहीं है। जो भी लोग फॉर्म नहीं भर पाएंगे, उनका नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाएगा। इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक जरूरी है। इस पर कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के लिए सहमति दे दी।
कई दल कर रहे हैं विरोध
उल्लेखनीय है कि 28 जून से बिहार में मतदाता पुनरीक्षण अभियान शुरू हो चुका है। यह 30 सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद नई मतदाता सूची जारी होगी। बिहार में आरजेडी और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां इस अभियान को अलोकतांत्रिक बताते हुए विरोध कर रही हैं।



